अरुणिमा सिन्हा जीवनी - Arunima Sinha Biography in Hindi

By Anonymous
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Arunima Sinha Photo
क्या आप अरुणिमा सिन्हा - Arunima Sinha के बारे में जानना चाहते हैं? तो आप बिल्कुल सही आर्टिकल पढ़ रहे हैं क्योंकि यहाँ आप Arunima Sinha Story In Hindi में पूरी जानकारी आगे पढ़ने वाले हैं। सिर्फ आर्टिकल अंत तक जरूर पढ़े।

इस आर्टिकल में आप क्या क्या पढ़ने वाले है? - इस आर्टिकल में आप पढ़ने वाले हैं - Arunima Sinha Story In Hindi - अरुणिमा सिन्हा कौन हैं? अरुणिमा सिन्हा का जन्म कब हुआ? अरुणिमा सिन्हा दिल्ली कब जा रही थी? Arunima Sinha Train Accident कैसे हुआ? विकलांग होने के बावजूद भी अरुणिमा सिन्हा माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर विश्व की पहली दिव्यांग महिला पर्वतारोही बन गईं कैसे? अरुणिमा सिन्हा किसे अपना प्रेरणास्रोत मानती थी? अरुणिमा सिन्हा को कौन सा पुरस्कार मिला? Arunima Sinha Quotes In Hindi, अरुणिमा सिन्हा की शादी किससे हुई हैं? Arunima Sinha Marriage इत्यादि।

अरुणिमा सिन्हा जीवनी हिंदी में - Arunima Sinha Biography in Hindi

एक ऐसी महिला जिसको एक ट्रेन दुर्घटना ने शरीर से अपाहिज बना दिया और जब जिन्दगी और मौत के बीच अपनी इच्छाशक्ति के दम पर लम्बे संघर्ष के बाद उनको दोबारा जीवन मिला तो उन्होंने भगवान का धन्यवाद किया और कहा की अगर भगवान ने मुझे दुबारा जीवन दिया है तो इसके पीछे जरुर कोई इतिहास रचने के लिए दिया हैं।

अरुणिमा सिन्हा कौन हैं? About Arunima Sinha In Hindi, अरुणिमा कौन सा खेल खेलती थी :- यह महिला और कोई नही भारत से राष्ट्रीय स्तर की पूर्व वालीबाल खिलाड़ी तथा माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय दिव्यांग अरुणिमा सिन्हा (Arunima Sinha) है। उन्होंने यह साबित कर दिया की शरीर से अपाहिज होने से कुछ नही होता। आपको दिमाग से अपाहिज नही होने चाहिए। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विपरित हो, इंसान सच्चे दिल से चाहे तो क्या कुछ नहीं कर सकता। चाहे वह महिला हो या पुरुष या फिर कोई विकलांग। यदि मानसिक रूप से मजबूत हैं तो पहाड़ो को चीरकर भी अपना रास्ता बना सकते हैं। पूर्वकाल में माउंटेन मैन" दशरथ मांझी बना भी चुके है।

(नोट:- इस पूरे आर्टिकल में कही दिव्यांग तो कही विकलांग शब्द का प्रयोग वाक्य के भाव के अनुसार हुआ हैं।)

अरुणिमा सिन्हा की पूरी कहानी:- Arunima Sinha Story in Hindi.

अँधेरे में चिराग ही काम करती है तो चलिए उनके जीवन की संघर्षमय कहानी को पढकर अपने जीवन में फैले हुए निराशा रूपी अंधकार को प्रकाश रूपी ज्वाला से प्रज्वलित कर लें।

Arunima Sinha Biography in Hindi - अरुणिमा सिन्हा का जन्म कब हुआ? When was Arunima Sinha born? अरुणिमा सिन्हा (जन्म 20 जुलाई 1988) उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर की निवासी हैं और केंद्रीय अद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में हेड कांस्टेबल के पद पर 2012 से कार्यरत हैं। वह एक रास्ट्रीय स्तर की वालीबाल खिलाडी रह चूँकि हैं। अरुणिमा सिन्हा दिल्ली कब जा रही थी? What was the purpose of arunima journey by train? 11 अप्रैल 2011 को CISF की परीक्षा में शामिल होने के लिए पद्मावती एक्सप्रेस (Padmavati Express) से लखनऊ से दिल्ली जा रही थी। अरुणिमा सिन्हा को क्या हुआ? Arunima Sinha Train Accident - रात के लगभग एक बजे बरेली के पास कुछ शातिर लुटेरों ने ट्रैन के डिब्बो में दाखिल हुए और अरुणिमा सिन्हा को अकेला देखकर उनके गले की गोल्ड चैन छिनने का प्रयास करने लगे। जिसका विरोध एक खिलाड़ी जितना कर सकता हैं अरुणिमा सिन्हा ने किया। जब अपराधी सफल नही हुए तो उन्होंने अरुणिमा जी को चलती ट्रैन से बाहर फेक दिया। ट्रैन से बाहर फेकने के कारण गहरी चोट आई । वे उठने की हालत में नही थी । पास वाले ट्रैक पर एक ट्रैन उनकी तरफ आ रही थी। उन्होंने ट्रैक से हटने की हर सम्भव कोशिश की परन्तु तब तक ट्रैन उनके बाएँ पैर के ऊपर से निकल चूँकि थी और उनका बायाँ पैर घुटने के निचे तक पूरी तरह से कट चूका था और दाएं पैर में से हड्डियाँ बाहर निकल आई थी। जिसके बाद वे होश खोई नही लेकिन शरीर का कोई भी अंग काम नही कर रहा था।

Arunima Sinha Story in Hindi - पूरी रात अरुणिमा सिन्हा कटे हुए पैर के साथ दर्द से चीखती चिल्लाती रही। 49 ट्रैन गुजरने के बाद पूरी तरह से अरुणिमा सिन्हा अपने जीवन की आस खो चुकी थी लेकिन शायद अरुणिमा सिन्हा के जीवन के किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अगले दिन जब सुबह हुई तो गाँव वाले उनको बरेली के अस्पताल में लेकर गए। वहां के डॉक्टरो ने उनकी हालत देखी और कहा की इनका पैर काटना पड़ेगा ताकि ये जीवित रह सकें परन्तु हमारे पास Blood और Anaesthesia नही है। (Anaesthesia एक इंजेक्शन है जो सर्जरी के दौरान होने वाले दर्द को कम करने या शरीर को सुन करने के लिए लगाया जाता है)।

Arunima Sinha Story in Hindi - अरुणिमा जी को दिखाई तो कुछ नही दे रहा था परन्तु उनको सुनाई जरुर दे रहा था और जब उन्होंने डॉक्टरो के मुंह से ये बात सुनी तो वे बोल पड़ी की डॉक्टर साहब जब मै ऐसी हालत में पूरी रात ट्रैक पर पड़ी रहकर दर्द को सहन करती रही तो पैर काटने के दौरान होने वाले दर्द को भी सहन कर लुंगी। अरुणिमा जी की हिम्मत को देखकर वहां के दो डॉक्टरो ने अपना एक -एक यूनिट खून दिया और बिना Anaesthesia के उनका पैर काट दिया।

अरुणिमा जी अपनी एक speech में कहती हैं की उस समय जो दर्द उनको हुआ था उसको वे आज भी जब जब उस पल को बताती है महसूस करती हैं।

जब मीडिया के द्वारा लोगो को और सरकार को ये पता चला की दुर्घटना की शिकार महिला एक राष्ट्रीय स्तर की वालीबाल खिलाडी है तो उनको बरेली से लखनऊ के हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया और बाद में 18 अप्रैल 2011 को उनको AIIMS ( All India Institute of Medical Sciences ) में भर्ती करवाया गया। जहा अपने जिंदगी और मौत से लगभग चार महीने तक लड़ती रही। चार महीनों तक इलाज चला और जिंदगी और मौत के जंग में अरुणिमा सिन्हा की जीत हुई। पैर कटने की वजह से उनको कृत्रिम पैर लगाया गया तथा दुसरे पैर में रोड डाली गई।

Arunima Sinha Story in Hindi - अरुणिमा सिन्हा के इस हालत को देखकर डॉक्टर भी हार मान चुके थे और उन्हें आराम करने की सलाह दे रहे थे। जबकि परिवार वाले और रिस्तेदारो के नजर में अब अरुणिमा सिन्हा कमजोर और विंकलांग हो चुकी थी लेकिन अरुणिमा सिन्हा ने अपने हौसलो में कोई कमी नही आने दी और किसी के आगे खुद को बेबस और लाचार घोषित नही करना चाहती थी।

“मंजिल मिल ही जाएगी भटकते हुए ही सही, गुमराह तो वो हैं जो घर से निकले ही नहीं।”

अरुणिमा यहीं नहीं रुकीं। युवाओं और जीवन में किसी भी प्रकार के अभाव के चलते निराशापूर्ण जीवन जी रहे लोगों में प्रेरणा और उत्साह जगाने के लिए उन्होंने अब दुनिया के सभी सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को लांघने का लक्ष्य तय किया है। इस क्रम में वे अब तक एशिया में एवरेस्ट, अफ्रीका में किलिमंजारो, यूरोप में एलब्रस, ऑस्ट्रेलिया में कोस्यूस्को, अर्जेंटीना में एकांकागुआ और इंडोनेशिया में कारस्टेंस पिरामिड पर तिरंगा लहरा चुकी हैं।

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अरुणिमा जी अगर हार मानकर और लाचार होकर घर पर बैठ जाती तो आज वह अपने घर-परिवार के लोगों पर बोझ होती। सम्पूर्ण जीवन उन्हें दूसरों के सहारे गुजारना पड़ता। लेकिन उनके बुलंद हौसले और आत्मविश्वास ने उन्हें टूटने से बचा लिया।मुश्किलें तो हर इंशान के जीवन में आतीं हैं, लेकिन विजयी वही होता है जो उन मुश्किलों से, बुलन्द हौसलों के साथ डटकर मुकाबला करता है।अरुणिमा सिन्हा हमारे देश की शान है और हमें उन से जीवन में आने वाले दुःखों और कठिनाइयों से लड़नेकी प्रेरणा लेनी चाहिए। हम तहे दिल से अरुणिमा सिन्हा को सलाम करते हैं।

अरुणिमा सिन्हा किसे अपना प्रेरणास्रोत मानती थी?

पर्वतारोही (Mountaineer) बनने की प्रेरणा:-
AIIMS में चल रहे इलाज के दौरान उन्होंने फिर से मिले इस जीवन में कुछ कर गुजरने का फैसला लिया। दिल और दिमाग को झकझोर देने वाली इस घटना के बाद भी उनके जीवन में निराशा नाम की कोई चीज नही थी। उन्होंने फैसला किया की वे अब वालीबाल नही जीवन का सबसे कठिन गेम करेंगी। इसके लिए उन्होंने माउंटेनियरिंग को चुना। अरुणिमा सिन्हा किसे अपना प्रेरणास्रोत मानती थी? Who did Arunima Sinha consider as her inspiration? अरुणिमा जी अपनी इस प्रेरणा का स्त्रोत भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह को मानती हैं जिन्होंने कैंसर को मात देकर दोबारा जीवन प्राप्त किया था।

उन्होंने अपना लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवेरेस्ट पर तिरंगा फहराने को बनाया। इसके लिए उन्होंने उत्तरकाशी में स्थित नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ़ माउंटेनियरिंग से पर्वतारोही का कोर्स किया और साथ ही भारत की पहली महिला पर्वतारोही " बछेंद्री पाल " से भी मिलकर गाइडलाइन मांगी।

माउंट एवरेस्ट सर करणारी पहिली अपंग महिला कौन? Who is the first handicapped to climb Mount Everest?

अरुणिमा सिन्हा (Arunima Sinha) जी की उपलब्धियां:-

Arunima Sinha Mount Everest - अरुणिमा ने एवरेस्ट पर कब जीत प्राप्त की थी? कठिन संघर्ष और मुशिबतो के बावजूद आख़िरकार 21 मई 2013 को 10 बजकर 55 मिनट पर उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर अरुणिमा सिन्हा विश्व की पहली दिव्यांग महिला पर्वतारोही बन गईं। माउंट एवरेस्ट को फतह करने का ये सफर 52 दिन तक चला था।

इतना ही नही माउंट एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने के बावजूद भी अरुणिमा जी रुकी नही उन्होंने दुनिया के सातों महाद्वीपों की ऊँची चोटियों पर विजय प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। जिनमे से अधिकतर पर वे भारत की तिरंगा फहरा चूँकि हैं और उनकी ये यात्रा आगे भी जारी रहेगी।

Arunima Sinha Mount Everest - अरुणिमा सिन्हा पर्वतारोही, Arunima Sinha Indian mountain climber - दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर विजय हाशिल करके अरुणिमा जी ने ये शाबित कर दिया की हौसलों की उड़ान ,लगन और आत्मविश्वास के सामने बड़ी से बड़ी मुसिबत भी घुटने टेक देती है।

अरुणिमा सिन्हा पर्वतारोही - अगर वे चाहती तो उस घटना के बाद आसानी से अपना जीवन यापन कर सकती थी क्योंकि उनको 2012 में ही CISF में हेड कांस्टेबल की नौकरी मिल गई थी। परन्तु अरुणिमा जी ने गुमनामी में जीवन यापन करने की बजाए एक नए रास्ते को अपनाया जिसमे हर कदम पर मुश्किलों का अम्बार था । लेकिन कुछ कर गुजरने की चाहत के कारण उनका नाम सुनहरे अक्षरों में देश के इतिहास में दर्ज हो गया। जिसको सदियों सालों तक लोग याद रखेंगे।

हर किसी के जीवन में पहाड़ से ऊंची कठिनाइयां आती हैं, जिस दिन वह अपनी कमजोरियों को ताकत बनाना शुरू करेगा। उस दिन हर ऊंचाई बौनी हो जाएगी। वह एवरेस्ट की चोटी पर चढ़कर खूब रोई थी लेकिन उनके आंसूओं के अधिकांश अंश खुशी के थे। दुख को उसने पीछे छोड़ दिया था और दुनिया की सबसे ऊंची चोटी से जिंदगी को नए अंदाज से देख रही थी।

अरुणिमा सिन्हा की पुरस्कार और सम्मान:-

अरुणिमा सिन्हा को कौन सा पुरस्कार मिला? Which award did Arunima Sinha get?
आज उनको भारत की सरकार तथा दूसरी संस्थाएं कई अवार्ड और सम्मान से सुशोभित कर चुकी हैं-
  • अरुणिमा सिन्हा को भारत सरकार की तरफ से 2015 में पदमश्री नाम के पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो कि भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है. पदमश्री पुरस्कार को भारत में किसी एक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले इंसान को दिया जाता है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणिमा की जीवनी-'बॉर्न एगेन इन द माउंटेन' का लोकार्पण किया।
  • अरुणिमा को वर्ष 2016 में तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड भी दिया गया. इनके द्वारा दिए गए योगदान को देखते हुए प्रथम महिला पुरस्कार से सन् 2018 में सम्मानित किया गया।
  • उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर जिले के भारत भारती संस्था ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली इस विकलांग महिला को सुल्तानपुर रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किये जाने की घोषणा की। सन 2016 में अरुणिमा सिन्हा को अम्बेडकरनगर रत्न पुरस्कार से अम्बेडकरनगर महोत्सव समिति की तरफ से नवाजा गया।
  • इतना ही नही वे गरीबो और दिव्यांगों की सहायता के लिए " शहीद चंद्रशेखर आजाद विकलांग खेल अकादमी " के नाम से एक संस्था भी चलाती हैं।
अरुणिमा सिन्हा के प्रेरक शब्द - Arunima Sinha Quotes Motivational-

“अभी तो इस बाज की असली उड़ान बाकी है,
अभी तो इस परिंदे का इम्तिहान बाकी है!
अभी अभी तो मैंने लांघा है समंदरों को,
अभी तो पूरा आसमान बाकी है!!”

अरुणिमा सिन्हा की शादी - Arunima Sinha Marriage

अरुणिमा सिन्हा की शादी 21 June 2018 को गौरव सिंह - Gaurav Singh से हुई हैं।

मै आशा करता हूँ की आपको अरुणिमा सिन्हा Arunima Sinha Indian mountain climber का Arunima Sinha Story in Hindi में पसंद आई हैं तो कृपया इस सफलता की कहानी को अपने दोस्तों और Relative के साथ share जरुर करें। ज्ञान बाटने से ज्ञान घटना नही बल्कि बढ़ता है, इसलिए निचे comment में बताएं की अरुणिमा सिन्हा के बारे में जानकारी हासिल करने के बाद आप उनकी जीवनी से क्या सीखे। अगर आपने हमारे फेसबुक पेज को अभी तक लाइक नहीं किया हैं, तो लाइक भी जरूर कीजिए। आप नीचे के लाइक बटन दबाकर भी फेसबुक पेज लाइक कर सकते हैं।
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1 comment:

  1. i am very proud of you my indian girl arunima shinga great hi toci

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