लड़कियां किशोरावस्था में खान पान पर रखे खास ध्यान

By Anonymous
lifestyle tips, healthy diets for girl
Health Tips For Girl In Adolescence
महिलाएं (Females) नई पीढ़ी (new generation) को जन्म देती है। ऐसे में हमारा भविष्य स्वस्थ (healthy) और सुरक्षित (Safe) हो, इसके लिए यह जरूरी है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य का ख्याल (care of health) रखें। किशोरावस्था (Adolescence) से यदि महिलाएं अपना ख्याल रखे तो, मां बनने के समय उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं होती है। इसके लिए समुचित खानपान और नियमित हेल्थ चेकअप (Regular Health Checkup) जरूरी है।

किशोरावस्था में शारीरिक बदलाव
(Physical changes in adolescence)
हार्मोनल (Hormonal) बदलाव के कारण लड़कों की अपेक्षा लड़कियों का विकास (development) ज्यादा तेजी से होता है। लड़कियों में कई तरह के शारीरिक बदलाव भी आते हैं जैसे- स्तन का विकास होना, pubic एवं शरीर में बाल का बढ़ना एवं मासिक चक्र (menstrual cycle) की शुरुआत आदि। वही, लड़कों में सेक्सुअल आर्गन (Sexual organ) का विकास, शरीर के आकार एवं ऊंचाई (Height) में परिवर्तन, दाढ़ी (Beard) और मूंछ का आना, आवाज में भारीपन यदि देखने को मिलता है।

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ऊर्जा की आवश्यकता और पूर्ति के स्रोत
(Energy requirement and supply sources)
किशोरावस्था (Adolescence) में ऊर्जा (Energy) की आवश्यकता उसके बीएमआर (Basal Metabolic Rate) पर निर्भर करता है। इस उम्र में मेटाबोलिक डिमांड (Metabolic Demand) के कारण ऊर्जा की आवश्यकता अधिक होती है। लड़कों को 2750-3020 kcal कैलोरी और लड़कियों को 2330-2440 kcal कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए उन्हें साबुत अनाज, फल, सब्जी, प्रोटीन (Protein) वाला खाना एवं दूध कम वसा वाला पदार्थ लेना चाहिए। हालांकि, इस जानकारी के अभाव में अधिकांश किशोरवय जंग फूड और अनियमित (Irregular) खानपान के शिकार हैं। प्रोटीन की मात्रा किशोरों के लीन बॉडी मास (Lean body mass) पर निर्भर करता है, जो 45-60gm तक प्रतिदिन होना चाहिए, जो चिकन (Chicken), मछली (Fish), अंडा (Egg), दूध एवं दूध से बनी चीजों से मिल सकती है। शाकाहारी (Vegetarian) में टोफू, सोयाबीन, बीन्स, नट्स आदि से इसकी पूर्ति की जा सकती है। इसकी कमी से उन्हें विकास (development) पर प्रभाव पड़ता है। लड़कियों (girls) का मासिक चक्र (menstrual cycle) देरी से आता है।

वसा ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। कुल ऊर्जा का 25% वसा से लेना चाहिए, जिसमें 10% ऊर्जा सैचुरेटेड फूड से होना चाहिए। 3% आवश्यक फैटी एसिड से होना चाहिए। यह लड़कियों के गर्भाशय (Uterus) के रक्त वाहिकाओं एवं मांसपेशियों को आराम देने में मदद करता है। इससे मासिक चक्र (menstrual cycle) के पहले और बाद में पेट दर्द कम होता है।

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किशोरावस्था में कैल्शियम की आवश्यकता कितनी होती है और पूर्ति के स्रोत क्या क्या है?
What is the need of calcium in adolescence and what is the source of supply?
किशोरावस्था (Adolescence) में हड्डियों का निर्माण भी तेजी से होता है, साथ ही वे मजबूत भी बनती है। कैल्शियम (Calcium) हड्डियो के निर्माण के लिए अति आवश्यक है और उसके शरीर में और अवशोषण (Absorption) के लिए विटामिन डी (vitamin-D) की भी जरूरी होती है। कैल्शियम की पूर्ति भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस से ही नही बचाती, बल्कि मनुष्य के कंकाल (Skeleton) के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 800 एमजी कैल्शियम लेने के लिए तीन-चार बार कैल्शियम से भरपूर खाना जैसे- दूध, चीज, आइसक्रीम, दही आदि का सेवन करना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया में 1995 में हुए नेशनल न्यूट्रिशन सर्वे (National Nutrition Survey) के अनुसार यह साबित हुआ था कि लड़कियां दूध में वसा की उपस्थिति के कारण लेना नहीं चाहती है। भारत में भी ऐसा मामले काफी देखने को मिलता है। उसके कारण लड़कियों की हड्डियां कमजोर होती है और उनमें कैल्शियम की Deficiency (कमी) भी पाई जाती है।

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