1942 के शहीद क्रांतिकारियों के याद में निकाली गई 101 मीटर का ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा

By Anonymous
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1942 के शहीद क्रांतिकारी


डुमराँव (बक्सर) 16 अगस्त, 2019 | 1942 के शहीद क्रांतिकारियों के याद में डुमराँव (बक्सर जिला) में 101 मीटर का तिरंगा यात्रा निकाली गई। डुमराव में हर वर्ष 16 अगस्त को यह यात्रा निकाली जाती है। यह ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा स्वयंशक्ति समाजिक संगठन के बैनर तले निकाली गई। पूरा देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता हैं, लेकिन बिहार के बक्‍सर स्थित डुमराँव में आजादी का जश्न 16 अगस्त को भी धूम धाम से मनाया जाता है। आगे पूरी जानकारी पढ़े:- डुमराँव का इतिहास क्या हैं? - History of Dumraon in hindi - 1942 का आंदोलन - क्रांतिकारी आंदोलन - Krantikari Andolan :-

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में पूरे देश के साथ डुमराँव में भी इसकी ज्वाला धधक उठी थी। 16 अगस्त, 1942 की शाम में हजारों आंदोलनकारी मुख्य बाजार में इकट्ठा हुए और जुलूस की शक्ल में थाने की ओर कूच कर गए. वहां, भीड़ ने थाने पर कब्जा कर मुख्य गुंबद पर क्रांतिकारियों द्वारा थाना पर तिरंगा लहरा दिया गया। अचानक थाना भवन पर तिरंगा लहराते देख अंग्रेजी हुकूमत की पुलिस सन्न रह गई और पुलिसों द्वारा फायरिंग में रामदास लोहार, कपिल कमकर, गोपाल कहार व रामदास सोनार घटनास्थल पर ही शहीद हो गए। सुखारी लोहार, अब्दुल रहीम, बिहारी लाल आदि कई लोग गोली से घायल हो गए।

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शहीद रामदास लोहार के प्रतिमा

उन वीर सपूतों के याद में डुमराँव में एक शहीद स्मारक बनाया गया है। आजादी के कई सालों बाद अपने क्रांतिवीरों को नमन करने के लिए धूम धाम से कार्यक्रम का आयोजित होता हैं। ऐसे वीर सपूतों को आने वाले इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा और प्रेरणा ली जाएगी। एक बार फिर से देश के आजादी के लिए अपना प्राण देने वाला सभी वीर क्रांतिकारियों को शत-शत नमन हैं।
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1 comment:

  1. शहीद रामदास लोहार जी पर लोहार समुदाय गर्व करता हैं। सतीश जी की कलम उच्चतम लेखन किया हैं

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