अनुसूचित जनजाति किसे कहते हैं? Anusuchit Janjati Kise Kahte Hai?

By Satish (Admin)
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Scheduled Tribes (ST)
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अनुसूचित जनजाति किसे कहते हैं? - Anusuchit Janjati Kise Kahte Hai?

अनुसूचित जनजातिया - Anusuchit Janjati - What is Scheduled Tribe (ST) In Hindi?
भारत के संविधान के अनुच्छेद 366 (25) अनुसूचित जनजातियों का उल्लेख उन समुदायों के रुप में किया गया है जो संविधान के अनुच्छेद 342 के अनुसार अनुसूचित हैं। इस अनुच्छेद में यह कहा गया है कि केवल वे समुदाय जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा प्रारंभिक लोक अधिसूचना के जरिए अथवा संसद के अधिनियम में अनुवर्ती संशोधन के जरिए इस प्रकार घोषित किया गया है, को अनुसूचित जनजाति माने जाएंगे।

Article 366 (25) of the Constitution of India refers to Scheduled Tribes as those communities who are scheduled in accordance with Article 342 of the Constitution. This Article says that only those communities who have been declared as such by the President through an initial public notification or through a subsequent amending Act of Parliament will be considered to be Scheduled Tribes.

अनुसूचित जनजातियों की सूची राज्य/संघ राज्यक्षेत्र विशेष है और किसी राज्य में किसी समुदाय को यदि अनुसूचित जनजाति के रूप में घोषित किया हो तो यह जरूरी नहीं कि दूसरे राज्य में भी उस समुदाय को अनुसूचित जाति माना जाए।

अनुसूचित जनजाति में कितनी जाति है?
प्रमुख जनजातियां - Pramukh Janjatiyan
भारत के संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत 700 से अधिक जनजातियां अधिसूचित हैं, जो देश के विभिन्न राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में फैली हुई हैं। अनेक जनजातियां एक से अधिक राज्यों में मौजूद हैं। अनुसूचित जनजातियों के रूप में अधिसूचित समुदायों की सबसे अधिक संख्या अर्थात् 62 उड़ीसा राज्य में है।

जनजातियों का अनुसूचीकरण एवं अनुसूची से हटाया जानाः
"अनुसूचित जनजातियां" शब्द की परिभाषा संविधान के अनुच्छेद 366 (25) में इस प्रकार की गई है, "ऐसी जनजाति या जनजाति समुदाय या इन जनजातियों और जनजातीय समुदायों का भाग या उनके समूह के रूप में, जिन्हें इस संविधान के उद्देश्यों के लिए अनुच्छेद 342 में अनुसूचित जनजातियां माना गया है" या अनुच्छेद 342 में अनुसूचित जनजातियों के विनिर्देशन के मामले में अनुसरण किए जाने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

The term "Scheduled Tribes" is defined in Article 366 (25) of the Constitution as "such tribes or tribal communities or parts of, or groups within such tribes, or tribal communities as are deemed under Article 342 to be Scheduled Tribes for the purposes of this Constitution". Article 342 prescribes the procedure to be followed in the matter of specification of Scheduled Tribes.

संविधान के अनुच्छेद 342 के खंड (1) के अधीन राष्ट्रपति, किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र, तथा जहां यह एक राज्य है, उसके राज्यपाल के परामर्श से जनजातियों या जनजातीय समुदायों या इनके भागों को अनुसूचित जनजातियों के रूप में अधिसूचित कर सकते हैं। इससे जनजाति या इसके भाग को संविधान में किए गए रक्षोपायों के प्रावधान का आह्वान करते हुए उनके संबंधित राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में उन्हें संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है।

Under Clause (1) of Article 342, the President may, with respect to any State or Union Territory, and where it is a State, after consultation with the Governor thereof, notify tribes or tribal communities or parts of these as Scheduled Tribes. This confers on the tribe, or part of it, a Constitutional status invoking the safeguards provided for in the Constitution, to these communities in their respective States/UTs.

अनुच्छेद 342 का खण्ड (2) संसद को किसी जनजाति या जनजातीय समुदाय या इनके भागों को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने या हटाने के लिए कानून पारित करने की शक्तियां प्रदान करता है।

Clause (2) of the Article 342 empowers the Parliament to pass a law to include in or exclude from the list of Scheduled Tribes, any tribe or tribal community or parts of these.

इस प्रकार, किसी विशेष राज्य/संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में अनुसूचित जनजातियों का पहला विनिर्देश संबंधित राज्य सरकारों के परामर्श से राष्ट्रपति के अधिसूचित आदेश द्वारा होता है। राज्य और संघ राज्यक्षेत्रों से संबंधित अनुसूचित जनजाति को विनिर्दिष्ट करने वाले आदेशों की सूची अनुलग्नक -5 क में दी गई है। राष्ट्रपति का आदेश संसद के अधिनियमों के द्वारा संशोधित किया गया है।

किसी समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में विनिर्दिष्ट करने के लिए अपनाये जाने वाले मानदंड निम्नलिखित हैं:
  • आदिम लक्षणों के संकेत
  • विशिष्ट संस्कृति
  • भौगोलिक एकाकीपन
  • समुदाय के साथ स्वछंद सम्पर्क में संकोच, तथा
  • पिछड़ापन।
इन मानदंडों का उल्लेख संविधान में नहीं है, परन्तु ये सुस्थापित और स्वीकृत हो चुके हैं। यह 1931 की जनगणना, प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग (कालेलकर) 1955, अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों की सूची के संशोधन संबधी सलाहकार समिति (लोकुर समिति), 1965 तथा अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजातिसंबंधी संयुक्त संसदीय समिति के आदेश (संशोधन) विधेयक 1967, चंदा समिति, 1969 में उल्लिखित परिभाषाओं को ध्यान में रखा जाता है।

अनुसूचित जनजातियों की राज्य/संघ राज्यक्षेत्र-वार सूची अनुलग्नक 5-ख में दी गई है। हरियाणा और पंजाब राज्यों तथा चंडीगढ़ और दिल्ली संघ राज्यक्षेत्रों में किसी भी समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में विनिर्दिष्ट नहीं किया गया है।

व्यक्तियों की अनुसूचित जनजाति स्थिति का पता लगाना
जहां कोई व्यक्ति जन्म से अनुसूचित जनजाति से संबंधित होने का दावा करता है वहां यह सत्यापित किया जाना चाहिए:
(i) कि वह व्यक्ति या उसके माता-पिता दावा किए गए समुदाय से संबंधित हैं,
(ii) कि वह समुदाय अपने संबंधित राज्य के संबंध में अनुसूचित जनजातियों को विनिर्दिष्ट करने वाले राष्ट्रपति के आदेश में शामिल है;
(iii) कि वह व्यक्ति उस राज्य तथा उस राज्य के अंतर्गत उस क्षेत्र से संबंधित है जिसका समुदाय अनुसूचित किया गया है,
(iv) कि वह या उसके माता-पिता/दादा-दादी आदि उसके मामले में लागू राष्ट्रपति के आदेश को अधिसूचित करने की तारीख को उस राज्य/संघ राज्यक्षेत्र के स्थायी निवासी होने चाहिए;
(v) वह किसी भी धर्म का अनुयायी हो सकता है;

वह व्यक्ति जो राष्ट्रपति द्वारा लागू आदेश की अधिसूचना जारी होने के समय अपने स्थायी निवास स्थान से अस्थाई रूप से दूर होता है अर्थात् उदाहरण के लिए जीविकोपार्जन या शिक्षा प्राप्त करने आदि के कारण तो उसके मामले में उसे भी अनुसूचित जनजाति के रूप में माना जा सकता है, यदि उसकी जनजाति/समुदाय को उस आदेश में उसके राज्य/संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में विनिर्दिष्ट किया गया है। परन्तु इस तथ्य के बावजूद कि उस राज्य में जहां वह अस्थायी रूप से बस गया है, के संबंध में उसकी जनजाति के नाम को राष्ट्रपति के किसी आदेश में अधिसूचित किया गया है, उसके अस्थाई निवास के संबंध में उसे राष्ट्रपति के उक्त आदेश में शामिल नहीं माना जा सकता है।

राष्ट्रपति के संबंधित आदेश के अधिसूचित होने की तारीख के पश्चात् पैदा हुए लोगों के सम्बन्ध में अनुसूचित जनजाति की हैसियत प्राप्त करने के लिए वह निवास स्थान मान्य होगा जो उक्त आदेश जिसके तहत उन्होंने इस प्रकार की जनजाति होने का दावा किया है, के अधिसूचित होने की तारीख को उनके माता-पिता का स्थायी निवास स्थान था। यह लक्षद्वीप संघ शासित क्षेत्र की अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होता है, जिनके लिए अनुसूचित जनजाति की स्थिति की पात्रता के लिए इस संघ शासित क्षेत्र में जन्म होना अपेक्षित होता है।

एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के बाद अनुसूचित जनजाति का दावा
(i) यदि एक व्यक्ति राज्य के उस भाग जिसके संबंध में उसका समुदाय अनुसूचित है, से उसी राज्य के दूसरे भाग जिसके संबंध में वह समुदाय अनुसूचित नहीं है, में चला जाता है तो वह व्यक्ति उस राज्य के संबंध में अनुसूचित जनजाति का एक सदस्य समझा जाता रहेगा।
(ii) यदि एक व्यक्ति एक राज्य से दूसरे राज्य में चला जाता है तो वह केवल अपने मूल राज्य के संबंध में अनुसूचित जनजाति से संबंधित होने का दावा कर सकता है और उस राज्य के संबंध में नहीं जिसमें वह बस गया है।

विवाह के माध्यम से अनुसूचित जनजाति के दावे
इस संबंध में मार्गदर्शी सिद्धांत यह है कि कोई भी व्यक्ति जो जन्म से अनुसूचित जनजाति का नहीं है, उसे केवल इसलिए अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं माना जाएगा कि उसने एक अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्ति से विवाह कर लिया है। इसी प्रकार कोई व्यक्ति जो किसी अनुसूचित जनजाति का सदस्य है वह अपनी शादी उस व्यक्ति जो अनुसूचित जनजाति से संबंधित नहीं है, के साथ हो जाने के बाद भी अनुसूचित जनजाति का सदस्य बना रहेगा।

अनुसूचित जनजाति का प्रमाण-पत्र जारी करना
अनुसूचित जनजाति से संबंधित उम्मीदवारों को निम्नलिखित प्राधिकारियों में से किसी प्राधिकारी द्वारा निर्धारित प्रपत्र में अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र जारी किए जा सकते हैं :
(i) जिला मजिस्ट्रेट/अपर जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर/उपायुक्त/अपर उपायुक्त/उप-कलेक्टर/प्रथम श्रेणी वेतन भोगी मजिस्ट्रेट/नगर मजिस्ट्रेट/उप-मण्डलीय मजिस्ट्रेट/तालुका मजिस्ट्रेट/कार्यपालक मजिस्ट्रेट/अतिरिक्त सहायक आयुक्त। (जो प्रथम श्रेणी के वेतन भोगी मजिस्ट्रेट से निचले स्तर के न हों)
(ii) मुख्य प्रेसिडेन्सी मजिस्ट्रेट/अपर मुख्य प्रेसिडेन्सी मजिस्ट्रेट/प्रेसिडेन्सी मजिस्ट्रेट।
(iii) राजस्व अधिकारी, जो तहसीलदार से नीचे के स्तर के न हों।
(iv) उस क्षेत्र जहां वह उम्मीदवार तथा/या उसका परिवार सामान्य तौर पर निवास करता है, का उप-मण्डलीय अधिकारी।
(v) प्रशासक/प्रशासक के सचिव/विकास अधिकारी (लक्षद्वीप द्वीप समूह)।

बिना उचित सत्यापन के अनुसूचित जनजाति के प्रमाण-पत्र जारी करने वाले अधिकारियों के लिए दंड
यदि किसी अधिकारी के संबंध में यह पता चलता है कि उसने अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र असावधानीपूर्वक तथा बिना उचित सत्यापन के जारी कर दिया है, तो भारतीय दंड संहिता के संगत प्रावधानों के अंतर्गत उसके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। यह उन पर लागू उपयुक्त अनुशासनिक नियमों के अंतर्गत की जाने वाली कार्रवाई के अलावा होगी।

अन्य राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों से आए प्रवासियों को अनुसूचित जनजाति के प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को उदार बनाना
किसी अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्ति जो एक राज्य से दूसरे राज्य में रोजगार, शिक्षा आदि के लिए आए हैं वे उस राज्य से प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में बहुत कठिनाई का अनुभव करते हैं जहां से वे आए हैं। इस कठिनाई को दूर करने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि एक राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन का निर्धारित प्राधिकारी उसके मातापिता के मूल राज्य के निर्धारित प्राधिकारी द्वारा उसके माता/पिता को जारी किए गए वास्तविक प्रमाण-पत्र को प्रस्तुत करने पर उस परिस्थिति को छोड़कर जिसमें वह निर्धारित प्राधिकारी यह महसूस करता है कि प्रमाण-पत्र जारी करने से पूर्व मूल राज्य के माध्यम से विस्तृत जांच आवश्यक है, उस व्यक्ति को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण-पत्र जारी कर सकता है जो किसी अन्य राज्य से आया है। यह प्रमाण-पत्र इसका ध्यान किए बिना जारी कर दिया जाएगा कि वह संबंधित जनजाति उस राज्य/संघ राज्यक्षेत्र जिससे वह व्यक्ति आया है, में अनुसूचित है अथवा नहीं। तथापि, वे उस राज्य में अनुसूचित जनजातियों के लाभों के पात्र नहीं होंगे जहां वे स्थानांतारित हुए हैं।

अनुसूचित जनजातियों के विनिर्दिष्ट आदेशों में समावेश, उससे अपवर्जन तथा अन्य संशोधनों हेतु दावों के निर्धारण के लिए प्रविधियां
जून, 1999 में सरकार ने अनुसूचित जनजातियों की सूचियों में समावेशन और आय अपवर्जन करने संबंधी दावों के निर्णय के लिए प्रविधियों को अनुमोदित किया जिन्हें 25.6.2002 को पुनः संशोधित किया गया। इन अनुमोदित प्रविधियों के अनुसार केवल उन मामलों को विचारार्थ लिया जाएगा जिन पर राज्य सरकार, भारत के महापंजीयक (आरजीआई) तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) (जो अब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग है) की सहमति होगी। जब कभी किसी राज्य की अनुसूचित जनजातियों की सूची में किसी समुदाय को शामिल करने अथवा उस से अपवर्जन के लिए मंत्रालय में अभ्यावेदन प्राप्त होते हैं तो प्रविधियों के अनुसार मंत्रालय संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत आवश्यकतानुसार संबधित राज्य सरकार को उस अभ्यावेदन को सिफारिश के लिए भेज देता है। यदि संबंधित राज्य सरकार उस प्रस्ताव की सिफारिश करती है तो उसे भारत के महापंजीयक को भेज दिया जाता है। यदि भारत के महापंजीयक राज्य सरकार की सिफारिश से संतुष्ट होते हैं तो वह उस प्रस्ताव को केन्द्र सरकार को अपनी सिफारिश के साथ भेजते हैं। तत्पश्चार, सरकार उस प्रस्ताव को अनुसूचित जनजाति आयोग को सिफारिश के लिए भेजती है। यदि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भी सिफारिश कर देता है तो उस मामले पर मंत्रिमंडल के निर्णय के लिए कार्यवाही की जाती है। उसके बाद मामले को राष्ट्रपति के आदेश को संशोधित करने के लिए एक विधेयक के रूप में संसद के समक्ष प्रस्तुत कर किया जाता है। अनुसूचित जनजातियों के लिए शामिल करने/या उस से अपवर्जन के मामले जिसका राज्य सरकार/संघ शासित क्षेत्र अथवा आरजीआई, अथवा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग समर्थन नहीं करते, निरस्त कर दिए जाते हैं।

भारत में अनुसूचित जनजाति की संख्या कितनी है?
जनगणना 2011 के अनुसार भारत में अनुसूचित जनजाति की संख्या 10.45 करोड़ हैं।

भारत में जनजातियों की प्रतिशत जनसंख्या क्या है?/भारत में आदिवासी कितने प्रतिशत है?
जनगणना 2011, के अनुसार भारत में जनजातियों की प्रतिशत जनसंख्या देश की कुल जनसंख्या का 8.6 प्रतिशत है तथा कुल ग्रामीण जनसंख्या का 11.3 प्रतिशत है। अनुसूचित जनजाति के पुरूषों की जनसंख्या 5.25 करोड़ तथा अजजा महिलाओं की जनसंख्या 5.20 करोड़ है।

सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति वाला राज्य कौन सा है? - Sarvadhik anusuchit janjati wala rajya?
अनुसूचित जनजातियों के रूप में अधिसूचित समुदायों की सबसे अधिक संख्या अर्थात् 62 उड़ीसा राज्य में है।

भारत में अनुसूचित जनजातियों/आदिवासियों का धर्म क्या है?
भारत में अनुसूचित जनजातियां समुदाय किसी लिखित धर्मग्रंथ के अनुसार किसी धर्म का पालन नही करते हैं। अनुसूचित जनजातियां/आदिवासी समुदाय प्रकृति को मानते हैं।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन कब किया गया?
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन 19 फरवरी 2004 किया गया।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष कौन हैं?
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष https://ncst.nic.in/ के अनुसार Vacant (खाली हैं)।

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3 comments:

  1. बहुत ऐसे लोग होते हैं जिनको पता नही रहता है कि अनुसूचित जनजाति किसे कहते हैं? और जानकारी के अभाव में विचलित हो जाते हैं। आप अनुसूचित जनजाति के परिभाषा के जानकारी शेयर कीजिये बहुत पढ़ कर अच्छा लगा। मेरे तरफ से सेवा जोहार

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  2. अनुसूचित जनजाति सुरेश शर्माMarch 6, 2021 at 2:18 PM

    अनुसूचित जनजाति के बारे में बहुत अच्छी जानकारी। धन्यवाद

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