होमन्यूज़राजधानी में बिहार के लोहार समुदाय किया दो दिवसीय सत्याग्रह

राजधानी में बिहार के लोहार समुदाय किया दो दिवसीय सत्याग्रह

दिल्ली | सावन की झमझमाती हुई बारिश की परवाह किए बिना इतिहास में पहली बार बिहार के आदिवसी लोहार जनजातीय समस्या (लोहार,लोहारा) को लेकर भारत सरकार और जनजातीय मंत्रालय के विरोध में देश की राजधानी दिल्ली में संसद मार्ग पर दो दिवसीय 36 घंटे (30 से 31 अगस्त, 2018) की सत्याग्रह किया। सत्याग्रह में आरोप लगाया गया कि जनजातीय मंत्रालय ही जनजातियों का दुश्मन बन बैठा है। यह मंत्रालय जनजातियों का हितों की रक्षा करने में नाकाम है तथा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सरकार को बदनाम करने पर अड़ा हुआ है। यह सत्याग्रह लोहार विकास मंच(बिहार) के द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष राज किशोर शर्मा के नेतृत्व में एक्ट 23/2016 के आलोक में बिहार के आदिवासी अ०ज०जा० लोहार जाति (caste) के समस्या के समाधान के लिए, देवनागरी लिपि में लोहार और Roman script (रोमन लिपि) में LOHARA लिखा हुआ स्पष्ट अधिसूचना (Notification) जारी करने के लिए के लिए तथा संविधान और राष्ट्रपति नोटिफिकेशन की रक्षा हेतु किया गया।

राजधानी में बिहार के लोहार समुदाय के सत्याग्रह
राजधानी में बिहार के लोहार समुदाय के सत्याग्रह

क्या है पूरी मामला? श्री शर्मा ने बताया बिहार में 06 सितंबर, 1950 के राजपत्र (Gazette) के द्वारा लोहार को अनुसुचित जनजाति का अरक्षण मिल चुका है। भारत के संविधान के मूल कॉपी अंग्रेजी में और सरकार का आॅफिस कार्य अधिकतर रोमन लिपि में निष्पादित होने के कारण लोहार को रोमन लिपि में LOHARA लिखा गया था। एक्ट 108/1976 में LOHARA को देवनागरी लिपि में लोहार लिखा गया और यह लोहार 2006 तक था। लेकिन बिहार के कुछ दबंग नेताओ और कांग्रेस सरकार के सोची समझी धारणा के कारण गौर नीतिगत तरीका से एक्ट 48/2006 में LOHARA को देवनागरी लिपि में लोहारा एक जाति बना दिया। जबकि देश में लोहारा कोई जाति नही है। सिर्फ रोमन लिपि में LOHARA लिखाता है।

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वर्तमान बीजेपी सरकार वर्ष 2016 में हजारों की संख्या में प्रचलन में नहीं रहने वाले बेकार कानून को रद्द कर दिया, जिसमें ग्यारह अधिनियम आदिवासियों का है। इसी अधिनियम के अंतर्गत बिहार के LOHARA (लोहार) का मामला है। अधिनियम -48, 2006 यानी लोहारा को निरसन और संशोधन अधिनियम-23, 2016 से भारत सरकार रद्द कर दिया। लेकिन पुनः लोहार लिखा राजपत्र और अधिसूचना अधिनियम-23, 2016 के आलोक में दो वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं किया। अधिसूचना का प्रकाशन नही होने से सेन्ट्रल सर्विस में परेशानी आ रही है। जिससे आदिवासियों का मिला अधिकार मंत्रालय के कारण छीनने के कगार पर खड़ा है। इस अन्याय के खिलाफ आदिवासियों में रोष व्याप्त है। माननीय प्रधानमंत्री जी से मांग है कि अपने स्तर से पहल कर लंबित अधिनियम-23, 2016 का अधिसूचना चुनाव पूर्व तत्काल कराने की कृपा करें। अन्यथा गंभीर अंजाम हो सकता है और चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। जिससे चुनाव 2019 में भारत सरकार का सेहत खराब हो सकता है।

आगे श्री शर्मा के द्वारा बताया गया कि भारत सरकार के यहां बिहार प्रदेश के लोहार जाति का अनुसूचित जनजाति की निम्नलिखित दस्तावेज है:-

  1. प्रथम अनुसूचित जनजाति सूची प्रथम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से जारी भारत सरकार का राजपत्र, जिसमें LOHARA लिखा हैं।
  2. महामहिम राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी द्वारा जारी राजपत्र में लोहार का नाम देवनागरी लिपि में लोहार लिखा हुआ है।
  3. भारत सरकार द्वारा जारी एक्ट 108/1976 में देवनागरी लिपि में जारी किया गया लोहार का नाम LOHARA (लोहार) लिखा हुआ है।
  4. भारत सरकार द्वारा जारी बिहार के अनुसूचित जनजाति के सूची में देवनागरी में लोहार और रोमन लिपि में LOHARA है।
  5. जैसा की सन 1950 के अनुसूचित जनजाति के प्रथम सूची में रोमन लिपि/अंग्रेजी में LOHARA लिखा था। वैसा ही अंग्रेजी में LOHARA और हिंदी/देवनागरी लिपि में लोहार स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली में लोहार का नाम संग्रहित है।

इतने सारे प्रमाण के बावजूद 48/2006 में LOHARA (लोहार) को लोहारा पढ़ा गया। मोदी सरकार में अन्य 11 एक्ट के साथ 48/2006 भी एक्ट 23/2016 से जो प्रचलन में नहीं रहने वाले अधिनियम (Act) को भारत सरकार ने निरसन व संसोधन Act के तहत रद्द कर दिया हैं। लेकिन आरक्षण विरोधियों के द्वारा ग्यारह ACT का स्पष्ट राजपत्र और नोटिफिकेशन रोकवा दिया है ताकि जनजातियों को लाभ नहीं मिले।

क्या मांग की जा रही है?- इस सत्याग्रह के माध्यम से भारत सरकार और जनजातीय मंत्रालय से मांग की जा रही है कि एक्ट 23/2016 के आलोक में बिहार के आदिवासी अ०ज०जा० लोहार जाति (caste) के समस्या के समाधान के लिए, देवनागरी लिपि में लोहार और Roman script (रोमन लिपि) में LOHARA लिखा हुआ स्पष्ट अधिसूचना (Notification) जारी करें ताकि बिहार के लोहार आरक्षण का लाभ ले सके और निचले स्तर से ऊपर उठ सके।

इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शर्मा ने बिहार सहित पूरे देश के लोहार समाज को राजनीति के मुख्य पटल पर लाने का संकल्प लेते हुए कहा कि अगर यह नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया तो 2019 की लोकसभा चुनाव में सबक सिखाने का आह्वान भी किया जाएगा। इस मुद्दे पर बिहार के कई सांसद और मंत्री से भी मिला गया। मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा जी से भी मिला गया और बिहार के लोहार की समस्या से अवगत कराया गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा।

इस सत्याग्रह में प्रदेश सचिव रामा शंकर शर्मा, रविन्द्र शर्मा, अमरनाथ विश्वकर्मा, विक्रम प्रसाद विश्वकर्मा, राधेश्याम शर्मा, दशरथ शर्मा, पृथ्वीराज शर्मा, विशाल विश्वकर्मा, गोपाल शर्मा, शंभूनाथ विश्वकर्मा, वेद प्रकाश विश्वकर्मा, हरिश्चंद्र विश्वकर्मा, चंदन विश्वकर्मा एवम बिहार के कोने कोने से कई अन्य आदिवासी लोहार जाति के लोग शामिल रहे। यहाँ तक कि बिहार प्रदेश से अपने पेट चलाने के लिए दिल्ली में कमाने आए हुए हमारे लोहार भाई और अन्य प्रदेशों के लोहार समाज के लोगों ने भी सत्याग्रह में शामिल हुए। वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

— सतीश कुमार शर्मा

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Satish
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सतीश कुमार शर्मा ApnaLohara.Com नेटवर्क के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ हैं। वह एक आदिवासी, भारतीय लोहार, लेखक, ब्लॉगर और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
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