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स्वतंत्रता सेनानी रामकृत शर्मा जी का जीवन कहानी – Life story of freedom fighter Ramkrit Sharma

रामकृत शर्मा – अमर रहे! अमर रहे!! अमर रहे!!!वैशाली, बिहार (जनवरी 03, 2021, रविवार) | लोहार कल्याण समिति बिहार (Lohara Kalyan Samiti, Bihar) के सौजन्य से और समाज के सहयोग से दिनांक 25, दिसंबर 2020 दिन शुक्रवार को महान स्वतंत्रता सेनानी (Freedom Fighter) रामकृत शर्मा जी (Ramkrit Sharma ji) का प्रतिमा स्थापना संपन्न हुआ।

रामकृत बाबू का जीवन कथा – Life story of freedom fighter Ramkrit Sharma.

काली ठाकुर एवं जिलेबी देवी के घर वैशाली जिले के प्रखंड देसरी के छोटे से गांव में जन्मे छह भाई-बहनों में सबसे बड़े रामकृत शर्मा स्वतंत्रता संग्राम (Freedom Struggle) में वर्ष 1930 में कूद पड़े। 1912 में जन्मे रामकृत पर शर्मा जब छोटे थे तो अंग्रेजों की सितम देख दुखी हुआ करते थे। भारतीयों पर अत्याचारी अंग्रेज शासन का प्रताड़ना उन्हें इतना व्यतीत किया की गरीबी से जूझ रहे परिवार का बिना प्रवाह किए स्वतंत्रता आंदोलन में अपने कई साथियों के साथ कूद पड़े।

Freedom Fighter Ramkrit Sharma Statue
Freedom Fighter Ramkrit Sharma Statue

इनके पिता निहायत गरीब लोहार थे जो वंशानुगत पेशा लोहारगिरी (Blacksmithy) कर विभिन्न प्रकार का खेती गृहस्ती से जुड़े औजार बनाकर अपने बच्चों का परवरिश किये। तब के जमाने में लोहार को नगद आमदनी न के बराबर होती थी। गृहस्ती कमाना पड़ता था और फसल उगने पर गृहस्थों द्वारा 6 महीने या साल में अनाज पसेरी के रूप में मिला करता था। बड़ी कठिन परिवारिक जीवन था। इतनी बड़ी परिवारिक कठिनाइयों के बावजूद एक छोटे से समुदाय में जन्मे रामप्रीत बाबू को सारे दुख तकलीफ को झेलना मंजूर था, लेकिन अत्याचारी ब्रिटिश हुकूमत को सहना मंजूर न था। इस कारण अपने कुछ साथियों डॉक्टर भरत चौधरी, रामचंद्र सिंह एवं भुखनी सिंह इत्यादि के साथ अंग्रेजों से लोहा लेने की ठानी और 1930 में स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े।
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काली ठाकुर के बड़े पुत्र होने के कारण पिता के बाद इनके कंधे पर परिवार चलाने की जिम्मेवारी भी थी, लेकिन उनके भाई बहनों ने इन्हें हौसला अफजाई की और परिवारिक जिम्मेवारी से अलग रखा। यह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई बार जेल भी गए अंततः भारत आजाद हुआ।

इसी दरमियान इनकी शादी हुई और बड़े पुत्र रामबाबू शर्मा के बाद एक पुत्री कुलपति देवी और छोटे पुत्र रामकृष्ण शर्मा का जन्म हुआ। बाद के दिनों में यह इमरजेंसी के दौरान जयप्रकाश नारायण और कर्पूरी ठाकुर के विचार से प्रभावित होकर सामाजिक न्याय की लड़ाई में भी कूद पड़े। इनके बड़े पुत्र रामबाबू शर्मा ने एक घटना को याद करते हुए बताया कि इमरजेंसी के दौरान एक शाम बाबू जी (रामकृत शर्मा) अपने दरवाजे पर बैठे मकई की रोटी और पटुआ (जुट) का साग खा रहे थे। इसी बीच जननायक कर्पूरी ठाकुर जी (Jananayak Karpoori Thakur ji), मुनेश्वर सिंह और मुंशीलाल राय के साथ आए और कुछ साथी साथ में बैठकर मकई की रोटी और पटुआ का साग खाने लगे। 1969 में जब छोटे पुत्र राम के शर्मा जी की शादी थी तो कर्पूरी ठाकुर जी इन के बारात गए थे इतने महान थे बाबू रामकृत शर्मा।

उनके दोनों पुत्रों में बड़े पुत्र ने साइकिल की मरम्मत का कार्य किया तो दूसरे मशीनरी मैकेनिक के रूप में अपना जीवन यापन प्रारंभ किया। उनके दोनों पुत्र की पत्नी शिक्षा के क्षेत्र में जुड़ कर हैं। रामकृत बाबू अपने लिए कुछ नहीं किये। इनके साथी मुनेश्वर प्रसाद सिंह और मुंशीलाल लड़ाई के बाद राजनीति में एक मुकाम पाए और कई बार विधायक और बिहार सरकार के मंत्री रहे परंतु लोहार समुदाय का यह लाल सामाजिक भेदभाव का शिकार रहे और अंततः 3 नवंबर 1990 को 78 वर्ष के उम्र में हम सबको छोड़ दुनिया को अलविदा कह गए। उनकी मृत्यु के 30 साल गुजरने के बाद ही इनका एक आदमकद प्रतिमा नहीं लग पाया।

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कोरोना संक्रमण से बचाव के अभियान में जब लोहार कल्याण समिति (Lohara Kalyan Samiti), वैशाली के सदस्य सेनिटाइजर, मास्क, साबुन वितरण कर कोरोना संक्रमण से बचने के लिए समाज को जागरूक कर रहे थे तब टीम के सदस्य को इस बात की जानकारी हुई और निर्णय लिया कि देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी रामकृत शर्मा जी का आदमकद प्रतिमा को अवश्य लगाया जाएगा। फिर लोहार कल्याण समिति बिहार के प्रयास और सहयोग से दिनांक 25 दिसंबर 2020 को उनकी प्रतिमा का स्थापना कर अनावरण किया गया।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन और प्रतिमा अनावरण माननीय विधायिका श्रीमती प्रतिमा कुमारी (राजा पाकर)और श्री राजाराम शर्मा ब्यासजी के कर-कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ। इस शुभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में माननीय प्रमुख श्रीमती अनिता राय, माननीय मुखिया श्री श्रीमती इंदु देवी, विशिष्ट अतिथि धर्मपुत्र राम राय, माननीय जिला परिषद सदस्य श्री चंदेश्वर पासवान, माननीय सरपंच श्रीमती रीना देवी भी उपस्थित थे।

इस प्रतिमा अनावरण समारोह का अध्यक्षता डॉ. सत्यनारायण शर्मा (महासचिव, लोहार कल्याण समिति, बिहार – Lohara Kalyan Samiti, Bihar) एवं संचालन धर्मेंद्र कुमार शर्मा (प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष, लोहार कल्याण समिति, बिहार) ने किया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को सफल बनाने में आम भूमिका निभाने वाले लोहार कल्याण समिति के प्रमुख साथीगणो में रामकृत बाबू के बड़े पुत्र रामबाबू शर्मा, श्रीमती उर्मिला देवी (बड़े पुत्र के पत्नी), जुगल किशोर ठाकुर (जिलाध्यक्ष, लोकस, वैशाली) जवाहर शर्मा (जिलाध्यक्ष लोकस युवा प्रकोष्ठ वैशाली) सुबोध शर्मा, राजकुमार शर्मा, बलविंदर शर्मा, नरेश शर्मा, सुरेश शर्मा, प्रमोद शर्मा, रामजी शर्मा, राम शर्मा, जितेंद्र शर्मा, राम प्रवेश शर्मा, जय कुमार ठाकुर मुखिया जी, गंगाराम, अवधेश शर्मा (जिला प्रवक्ता लोकस वैशाली) एवं बहुत से लोहार परिवार के सदस्यों का योगदान अहम रहा। मुझे भी यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि इस परिवार का एक कड़ी बन सका। रामकृत बाबू के बड़े पुत्र रामबाबू शर्मा के सबसे छोटी पुत्री मेरी पत्नी हैं।

जिस जमाने में समाज में सामाजिक भेदभाव, उत्पीड़न एक तरफ थी और दूसरों तरफ गरीबी का दंश, इन सब का प्रकार के बिना प्रवाह, बिना विचलित हुए लोहार समुदाय में एक हीरा चमक उठा – उस हीरे का नाम था रामकृत शर्मा हैं, हम बिहार के तमाम लोहार भाइयों एवं संगठनों से अनुरोध करते हैं कि अपने समुदाय में भी ऐसे अनेक स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी महापुरुष होंगे, उन्हें खोज करके उनका प्रतिमा स्थापित किया जाना चाहिए।

सरकार चर्चित हस्तियों को बड़े बड़े नगरों में प्रतिमा स्थापित कर चौराहों का, शहरों का, भवनों का, सड़कों का, नामकरण कर राजनीति करती है लेकिन लोहार समुदाय में जन्मे महापुरुषों का राजनीतिक, सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक के साथ-साथ सम्मानित सोच का भी काफी दोहन आज भी जारी हैं। हम इनके वंशज हैं, हमारा नैतिक कर्तव्य बनता हैं कि हम अपने महापुरुषों के नाम को दुनिया के सामने लाये और सामाजिक प्रतिष्ठा अर्जन करें। धन्यवाद!धर्मेंद्र कुमार शर्मा (कार्यकारी प्रदेश, अध्यक्ष लोकस बिहार)

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