जातीय जनगणना क्या है? Jatiy Janaganana Kya Hai in Hindi? जातीय जनगणना क्यों जरूरी है? Jatiy Janaganana Kyo Jaruri Hai In Hindi?

By Satish
Jatiy Janaganana Kya Hai in Hindi, Jatiy Janaganana Kyo Jaruri Hai In Hindi,
जातीय जनगणना क्यों जरूरी है?

हेल्लो दोस्तो, क्या आप जानना चाहते हैं कि "जातीय जनगणना क्या है? Jatiy Janaganana Kya Hai in Hindi? जातीय जनगणना क्यों जरूरी है? Jatiy Janaganana Kyo Jaruri Hai In Hindi? तो इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े।


जैसा कि आप जानते है कि भारत में 2021 की जनगणना होने ही वाला है। कई राजनीतिक दलों के द्वारा जातीय जनगणना (caste census) कराने की मांग वर्षो से हो रही है। 2018 में वर्तमान नरेंद्र मोदी जी के सरकार ने घोषणा की थी कि आगामी जनगणना में वह पिछड़ी जातियों की गणना कराएगी। लेकिन जातीय जनगणना के संबंध में सरकार से लोकसभा में 20 जुलाई 2021 को पूछे गए प्रश्न में सरकार के तरफ से केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय (Union Minister of State for Home Nityanand Rai) ने जवाब दिया कि फ़िलहाल केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) के अलावा किसी और जाति की गिनती का कोई आदेश नहीं दिया है। उसके बाद से न्यूज़ मीडिया, सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चित विषय जातीय जनगणना को लेकर है। जातीय जनगणना को लेकर कही डिबेट हो रहा है, तो कही आंदोलन हो रहा है। वर्तमान समय में हर पुब्लिक प्लेटफार्म पर टॉप ट्रेंडिंग टॉपिक जातीय जनगणना (caste census) है।

जनगणना किसे कहते हैं? जनगणना क्यों महत्वपूर्ण है? आशा है आप पिछले आर्टिकल में पढ़ ही चुके होंगे। अगर नही पढ़े है तो इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद नीचे आपको लिंक मिल जाएगा उस पर क्लिक कर जरूर पढ़ लीजिये। आगे पढ़िए - जातीय जनगणना क्या है? What is caste census in hindi जातीय जनगणना क्यों जरूरी है? Why is caste census necessary in hindi?

जातीय जनगणना क्या है? Jatiy Janaganana Kya Hai in Hindi?

जनगणना में किसी व्यक्ति की जाति से संबंधित सूचना का समावेश होना जातीय जनगणना कहलाता है। जातीय जनगणना के इतिहास क्या है? 140 वर्ष पहले 1881 में भारत में पहली जनगणना (Janaganana) हुई थी। भारत में आखिरी बार जातिय जनगणना (caste census) 1931 में हुई है। 1941 में जातीय जनगणना (caste census) हुई थी लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध (second World War) छिड़ जाने के कारण आंकड़ों को संकलित नहीं किया जा सका था। 2011 की जनगणना में भी जाति की जानकारी ली गई थी लेकिन अपरिहार्य कारणों का हवाला देकर रिपोर्ट जारी नहीं की गई और कहा जाता है कि करीब 34 करोड़ लोगों के बारे में जानकारी गलत है।

जातीय जनगणना क्यों जरूरी है? Jatiy Janaganana Kyo Jaruri Hai?

भारत में जातियों आखिरी जातीय जनगणना (Caste Census) 1931 के आधार पर है जो 90 साल पुराना है। नौ दसक में काफी कुछ बदल हुआ होगा। किसी जाति में अधिक बच्चों का जन्म हुआ होगा तो, किसी मे कम। 90 साल से देश को पता नहीं है कि किस जाति के कितने लोग हैं। जातिगत जनगणना से यह पता चलेगा कि कौन जाति अभी भी पिछड़ेपन का शिकार है, ताकि उनकी संख्या के अनुरूप उन्हें आरक्षण का लाभ देकर उनकी स्थिति मजबूत की जा सके। इसलिए जातीय जनगणना का सवाल और आवाज उठता रहा है।

जातीय जनगणना पर विभिन्न राजनीतिक दलों का बयान और पक्ष क्या है? :-
23 अगस्त 2021 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित 10 दलों के नेताओ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी (Prime Minister Narendra Modi) से मुलाकात कर जनगणना 2021 को जातिय आधारित के पक्ष में अपनी बात रखा। जातीय जनगणना पर बिहार के नेता का राय एक हैं।

जातिय जनगणना पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar Chief Minister Nitish Kumar) का मीडिया में एक बयान है - "पूरे देश में जाति आधारित जनगणना (caste based census) हुई तो बहुत लाभदायक होगा. सभी राज्य के लोगों की इच्छा है कि जाति आधारित जनगणना (caste based census) एक बार तो जरूर होनी चाहिए। ताकि पता चल जाए कि किसकी कितनी आबादी है. ये हो जाने पर सभी के लिए बेहतर तरीके से काम होगा।" नीतीश कुमार ने सबसे पहले 1990 में जाति आधारित जनगणना (Caste Based Census) कराने की मांग की थी।

बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव का जातीय जनगणना पर मीडिया में एक ब्याज है - "जब जानवरों व पेड़-पौधों की गिनती होती है, तब इंसानों की क्‍यों नहीं होनी चाहिए? सरकार के पास जातिगत समाज का आंकड़ा (caste society data) नहीं होगा तो सरकार कल्‍याणकारी योजनाएं (government welfare schemes) कैसे बना सकेगी?"

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू यादव ने जातिय जनगणना (caste census) पर 11 अगस्त 2021 को एक ट्वीट है - "अगर 2021 जनगणना में जातियों की गणना नहीं होगी तो बिहार के अलावा देश के सभी पिछड़े-अतिपिछड़ों के साथ दलित और अल्पसंख्यक भी गणना का बहिष्कार कर सकते है। जनगणना के जिन आँकड़ों से देश की बहुसंख्यक आबादी का भला नहीं होता हो तो फिर जानवरों की गणना वाले आँकड़ों का क्या हम अचार डालेंगे?" आगे उन्होंने 10 सितंबर 2021 को भी एक ट्वीट है - "जातीय जनगणना कोई राजनैतिक मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण की अति जरूरी पहल है।सामाजिक न्याय व बंधुता का प्रश्न मनुष्यता का प्रश्न है और जातिवार जनगणना के हासिल को उसी की एक कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए।"

जनता दल यूनाइटेड JD(U) की तरह रास्ट्रीय जनता दल (RJD) भी यह मानती है कि "जातिगत जनगणना से यह पता चलेगा कि कौन जाति अभी भी पिछड़ेपन का शिकार है, ताकि उनकी संख्या के अनुरूप उन्हें आरक्षण का लाभ देकर उनकी स्थिति मजबूत की जा सके।"

भीम आर्मी चीफ और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्र शेख आजाद (Chandra Shekhar Aazad) का मंगा हैं - "जातिगत जनगणना हो व जनंसख्या अनुपात में उन्हें हिस्सेदारी मिले"

2019 के फरवरी महीना में बिहार विधानमंडल (Bihar Legislature) और 2020 में बिहार विधान सभा (Bihar Legislative Assembly) में जातीय जनगणना (Caste Census)  कराने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास होने के बाद दो बार इसे केंद्र सरकार (central government) को भेजा जा चुका है।

महाराष्ट्र की विधानसभा (Maharashtra Legislative Assembly) में 8 जनवरी को जातीय जनगणना मांग का प्रस्ताव पारित हो चुका है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) राष्ट्रीय सचिव पंकजा मुंडे (Pankaja Munde) ऐसी मांग कर चुकी हैं।

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले (Ramdas Athawale) जाति गणना की मांग कर चुके हैं।

अपना दल (Apna Dal) की नेता और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल Anupriya Patel - Former Union Minister for Health & Family Welfare) भी जातीय जनगणना की मांग कर चुकी हैं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद संघमित्रा मौर्या (Sanghmitra Maurya) ने OBC Bill पर बहस के दौरान भी जातिगत जनगणना की मागं कर चुकी हैं।

उत्तर प्रदेश में भी समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) हो या Bahujan Samaj Party, जातियों का सही-सही आंकड़ा सामने लाने की मांग के समर्थन में इनका भी जोर है।

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दोस्तो, आशा है इस आर्टिकल में दी गई जानकारी - जातीय जनगणना क्या है? Jatiy Janaganana Kya Hai in Hindi? जातीय जनगणना क्यों जरूरी है? Jatiy Janaganana Kyo Jaruri Hai In Hindi? और जातीय जनगणना पर विभिन्न राजनीतिक दलों का बयान और पक्ष क्या है? आपको पसंद आया हो, तो सोशल मीडिया पर शेयर करे और नीचे कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। धन्यवाद
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जनगणना किसे कहते हैं? Janganana Kise Kahte Hai? जनगणना क्यों महत्वपूर्ण है?

By Satish 2 Comments
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जनगणना से आप क्या समझते हैं?

हेल्लो दोस्तो, क्या आप जानना चाहते हैं कि "जनगणना किसे कहते हैं? Janganana Kise Kahte Hai? / जनगणना से आप क्या समझते हैं? क्यों जनगणना महत्वपूर्ण है? जनगणना रिपोर्ट से क्या पता चलता है? तो बिल्कुल सही आर्टिकल पढ़ रहे हैं क्योंकि इस आर्टिकल में आपको जनगणना से जुड़े जानकारी मिलने वाला है जिसे आप ढूंढ रहे हैं। इसलिए पूरी आर्टिकल जरूर पढ़े।


जैसा कि आप जानते हैं भारत में 2021 का जनगणना होने ही वाली है। इस आर्टिकल में जनगणना से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाला कुछ सामान्य जानकारियां है। तो आगे पढ़िए - जनगणना किसे कहते हैं? Janganana Kise Kahte Hai? / जनगणना क्या है? Janganana Kya Hai?

जनगणना किसे कहते हैं? Janganana Kise Kahte Hai?

किसी देश (Country) या किसी भी क्षेत्र (Area) में रहने वाले लोगों के बारे में विधिवत रूप से सूचना प्राप्त करना और उसे अभिलेख (Record) करना जनगणना (Census) कहलाती है। जनगणना (Census) एक निश्चित समान्तराल (fixed parallel) के बाद की जाती है और शासकीय आदेश (Government Order) के तहत की जाती है।

आगे पढ़िए - जनगणना क्यों महत्वपूर्ण है? - Janaganana Kyo Mahatvapurn Hai?/ जनगणना क्यों आवश्यक है?

जनगणना क्यों महत्वपूर्ण है? - Janaganana Kyo Mahatvapurn Hai?

जनगणना क्यों की जाती है? सरकार देश की जनता के द्वारा बनाई जाती है और सरकार अपना कर्तव्य निर्वहन करते हुए देश की जनता के लिए कल्याणकारी नीतियां और योजनाए बनाती है जिसके लिये आँकड़ों की बार-बार जरूरत पड़ती है। जनगणना आँकड़े प्रभावी और सफल लोक प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण स्त्रोत होता हैं। लोकसभा, विधानसभा, पंचायत चुनाव में सीटों की बटवारा में भी जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। हर सरकार अपने क्षेत्राधिकार के तहत विभिन्ना प्रशासनिक इकाइयों में योजनाओं एवं विकास कार्यक्रमों के लिए जनगणना के आँकड़ों के आधार पर ही राजस्व का विरतण करती हैं। जनगणना के आधार पर ही बेघर लोगो की रहने/घर की व्यवस्था किया जाता है इत्यादि। इसलिए जनगणना महत्वपूर्ण है।

जनगणना के जरिए कौन कौन सी जानकारियां एकत्रित की जाती है?

जनगणना के जरिए सरकार अपने नागरिकों के जीवन से जुड़ी जनगणनाकर्मियों द्वारा अनेक महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ एकत्र करती है। जैसे - उनका नाम, जन्मतिथि / उम्र, लिंग, साक्षरता, मातृभाषा, धर्म, वैवाहिक स्थिति इत्यादि। आगे पढ़िए - जनगणना रिपोर्ट से क्या पता चलता है? Janaganana Report Se Kya Pata Chalta Hai?

जनगणना रिपोर्ट से क्या पता चलता है? - Janaganana Report Se Kya Pata Chalta Hai?

जनगणना रिपोर्ट से किसी देश या क्षेत्र के जनसंख्या, लिंगानुपात, साक्षरता दर, जनसंख्या घनत्व, धर्म की जनसंख्या, शिक्षा दर, भाषा, इत्यादि की जानकारी मिलती है।

भारत में कितने वर्षों के अंतराल के पश्चात जनगणना की जाती है?

जनगणना कितने सालों में होती है? ब्रिटिश सरकार के समय 1872 में वायसराय लॉर्ड मेयो के अधीन पहली बार कराई गयी थी। उसके बाद से भारत में हर 10 वर्षों के अंतराल के पश्चात जनगणना की जाती है। हालाकि भारत की पहली संपूर्ण जनगणना 1881 में हुई। आख़िरी जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी और 2021 में अगली जनगणना होनी है।

वर्तमान में भारत की जनसंख्या कितने हैं?

WorldoMeters.info वेबसाइट जो विश्व के जनसंख्या वृद्धि दर संबंधी आंकड़ों पर नजर रखती है। इस वेबसाइट पर विश्व के किसी भी देश के Live जनसंख्या देखा जा सकता है, के अनुसार भारत की वर्तमान जनसंख्या (India Current Population) 13.96 अरब (1,396,105,124) यानी 139.6 करोड़ हो चुकी है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या के रिपोर्ट के अनुसार भारत की आबादी (India Population) 1.21 अरब यानी 121 करोड़ है।

FAQ:-

Q1. 2021 की जनगणना का आदर्श वाक्य क्या है?
Ans:- भारत के जनगणना 2021 का आदर्श वाक्य का विषय (थीम) “जन भागीदारी से जनकल्याण” है।

Q2. भारत में 2021 की जनसंख्या कितनी है?
Ans:- भारत में 2021 की जनसंख्या जनगणना 2021 होने के बाद ही पता चलेगी। 2021 की जनगणना देश की 16 वीं जनगणना है, जो अभी तक आरंभ नही हुई है।

Q3. 2021 की जनगणना कितनी भाषाओं में होगी?
Ans:- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2019 के सितंबर महीने में कहा था कि 2021 की राष्ट्रीय जनगणना (National Census) पूरी तरह से मोबाइल फोन एप्लिकेशन (Mobile Phone Application) के माध्यम से आयोजित की जाएगी। 2021 की जनगणना 16 भाषाओं में की जाएगी।

Q4. वर्तमान में जनगणना आयुक्त कौन है?
Ans:- देश के आजादी के बाद से जनगणना (Census) भारत सरकार के गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त (Registrar General & Census Commissioner) द्वारा कराई जाती है. भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्‍त विवेक जोशी (Vivek Joshi) हैं।

Q5. भारत में पहली बार जनगणना कब हुआ था?
Ans:- भारत में पहली बार जनगणना वर्ष 1872 में हुआ था। वहीं स्वतंत्र भारत में पहली बार वर्ष 1951 में जनगणना हुई।

Q6. भारत में अब तक कितनी जनगणना हो चुकी है?
Ans:- भारत में 2011 तक 15 बार जनगणना की जा चुकी है।

पिछली जनगणना 2011 से कुछ प्रश्न इस प्रकार है
Q7. भारत की जनसंख्या 2011 के अनुसार कितनी है?
Ans:- भारत की जनसंख्या 2011 के अनुसार 1,21,08,54,977 (1.21 करोड़) है।

Q8. जनगणना 2011 के अनुसार भारत की जनसंख्या वृद्धि दर कितनी रही है?
Ans:- जनगणना 2021 के अनुसार, 2001 से 2011 के बीच भारत की जनसंख्या वृद्धि दर 17.72% रही है।

Q9. भारत का जनघनत्व कितना है?
Ans:- जनगणना 2011 के अनुसार, भारत का जनघनत्व 382 प्रति वर्ग किमी है।

भारत के आजादी के समय जनसंख्या
Q10. 1947 में भारत की जनसंख्या कितनी थी?
Ans:- 1947 में भारत की जनसंख्या 33 करोड़ थी।

दोस्तो, आशा है इस आर्टिकल में दी गई जानकारी - जनगणना किसे कहते हैं? Janganana Kise Kahte Hai? / जनगणना से आप क्या समझते हैं? / जनगणना का क्या अर्थ है? क्यों जनगणना महत्वपूर्ण है? जनगणना रिपोर्ट से क्या पता चलता है? 2021 की जनगणना का आदर्श वाक्य क्या है? भारत में 2021 की जनसंख्या कितनी है? 2021 की जनगणना कितनी भाषाओं में होगी? 1947 में भारत की जनसंख्या कितनी थी? जनगणना क्यों आवश्यक है? जनगणना से क्या लाभ होता है? आपको पसंद आये हो तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करे और नीचे कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। धन्यवाद
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अन्य पिछड़ा वर्ग किसे कहते हैं? - OBC Kise Kahte Hai? OBC आरक्षण कितना है?

By Satish
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अन्य पिछड़ा वर्ग किसे कहते हैं
हेल्लो दोस्तो, क्या आप जानना चाहते हैं कि "अन्य पिछड़ा वर्ग किसे कहते हैं? - Any Pichhada Varg Kise Kahate Hai? / OBC Kise Kahte Hai? / Other Backward Class Kise Kahte Hai? अन्य पिछड़े वर्गों हेतु कितने प्रतिशत? /OBC आरक्षण कितना है? तो आप बिल्कुल सही आर्टिकल पढ़ रहे हैं क्योंकि इस आर्टिकल में पिछड़ा वर्ग से जुड़े लगभग सभी सवालों का उत्तर आपको पढ़ने को मिलेगा- जैसे - अन्य पिछड़ा वर्ग किसे कहते हैं? भारतीय संविधान में पिछड़े वर्गों के लिए क्या प्रावधान है? OBC का आरक्षण कितना है? ओबीसी आरक्षण कब लागू हुआ? राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की स्थापना कब की गई? राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन क्यों किया गया? राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग कौन से अनुच्छेद में है? ओबीसी वर्ग में क्या क्रीमी लेयर और गैर क्रीमी लेयर के बीच अंतर है? इत्यादि। अतः इस आर्टिकल को अंत तक एक बार जरूर पढ़ें और नीचे कमेंट में अपना प्रतिक्रिया दे या कोई सवाल हो तो पूछे। तो आगे पढ़िए अपने सवाल के जवाब..............

सबसे पहले आप जानिए - "पिछड़ा वर्ग / जाति" को "अन्य पिछड़ा वर्ग" अंग्रेजी में "Other Backward Class" और संक्षिप्त में "OBC (ओबीसी)" लिखा और बोला जाता है। आगे पढ़िए - अन्य पिछड़ा वर्ग किसे कहते हैं? / OBC किसे कहते हैं?

अन्य पिछड़ा वर्ग किसे कहते हैं? - Any Pichhada Varg Kise Kahate Hai?

'राजनीतिक कोश' के अनुसार, “पिछड़े वर्गों का अभिप्राय समाज के उन वर्गों से है, जो सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े होने के कारण समाज के अन्य वर्गों की तुलना में निचले स्तर पर हों।" पिछड़ा वर्ग में कौन सी जाति आती है? पिछड़ा वर्ग में सामान्यतः नाई, बढ़ई, कुर्मी, अहीर, कुम्हार, बनिया आदि बहुत - सी जातियाँ आती हैं।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 15(4), 16(4) और 340(1) में “पिछड़े वर्ग (backward class)” शब्द का उल्लेख किया गया है। अनुच्छेद 15(4) एवं 16(4) में प्रावधान किया गया है कि राज्य द्वारा सामाजिक (Social) और शैक्षिक (Educational) रूप से “पिछड़े वर्गों (backward classes)” के कल्याण के लिये विशेष प्रावधान किया जा सकता है या विशेष सुविधाएँ दी जा सकतीं हैं

भारत के संविधान के अनुच्छेद 15(4) क्या है? - इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खंड (2) की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 16(4) क्या है? - इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य को पिछड़े हुए नागरिकों के किसी वर्ग के पक्ष में, जिनका प्रतिनिधित्व राज्य की राय में राज्य के अधीन सेवाओं में पर्याप्त नहीं है, नियुक्तियों या पदों के आरक्षण के लिए उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।

संविधान के अनुच्छेद 340 क्या है? पिछड़े वर्गों की दशाओं के अन्वेषण के लिए आयोग की नियुक्ति
(1) राष्ट्रपति, भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की दशाओं के और जिन कठिनाइयों को वे झेल रहे हैं उनके अन्वेषण के लिए और उन कठिनाइयों को दूर करने और उनकी दशा को सुधारने के लिए संघ या किसी राज्य द्वारा जो उपाय किए जाने चाहिएं उनके बारे में और उस प्रयोजन के लिए संघ या किसी राज्य द्वारा जो अनुदान किए जाने चाहिएं और जिन शर्तों के अधीन वे अनुदान किए जाने चाहिएं उनके बारे में सिफारिश करने के लिए, आदेश द्वारा, एक आयोग नियुक्त कर सकेगा जो ऐसे व्यक्तियों से मिलकर बनेगा जो वह ठीक समझे और ऐसे आयोग को नियुक्त करने वाले आदेश में आयोग द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया परिनिश्चित की जाएगी।

(2) इस प्रकार नियुक्त आयोग अपने को निर्देशित विषयों का अन्वेषण करेगा और राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देगा, जिसमें उसके द्वारा पाए गए तथ्य उपवर्णित किए जाएंगे और जिसमें ऐसी सिफारिशें की जाएंगी जिन्हें आयोग उचित समझे।

(3) राष्ट्रपति, इस प्रकार दिए गए प्रतिवेदन की एक प्रति, उस पर की गई कार्रवाई को स्पष्ट करने वाले ज्ञापन सहित, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा।

FAQ:-

Q:- OBC - ओबीसी का फुल फॉर्म क्या होता है?
Ans:- OBC - ओबीसी का फुल फॉर्म Other Backward Class होता है?

Q:- भारतीय संविधान में पिछड़े वर्गों के लिए क्या प्रावधान है?
Ans: - भारतीय संविधान में पिछड़े वर्गों के लिए सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग (SEBC - Socially and Educationally Backward Classes) के रूप में उलेखित किया जाता है, और भारत सरकार उनके सामाजिक और शैक्षिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के रोजगार और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 27% आरक्षण के प्रावधान हैं।

Q:- अन्य पिछड़ा वर्ग हेतु कितने प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है?
Ans: - अन्य पिछड़ा वर्ग हेतु 27% प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।

Q:- ओबीसी आरक्षण कब लागू हुआ?
Ans: - 2006 से केन्द्रीय सरकार के शैक्षिक संस्थानों में ओबीसी (अन्य पिछड़े वर्गों) के लिए आरक्षण शुरू हुआ।

Q:- प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग कब बना तथा इसकी अध्यक्षता किसने की?
Ans: - प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग जनवरी 1953 में बना तथा इसकी अध्यक्षता काका कालेलकर किये थे।

Q:- प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कब किया गया?
Ans: - प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन जनवरी, 1953 किया गया?

Q:- प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष कौन थे?
Ans: - प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष काका कालेलकर थे?

Q:- द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कब किया गया था?
Ans: - द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन 1 जनवरी 1979 किया गया था।

Q:- द्वितीय पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष कौन थे?
Ans:- द्वितीय पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष बीपी मंडल थे।

Q:- द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग कब नियुक्त किया गया था?
Ans:- द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग का प्रतिवेदन संसद में 30 अप्रैल 1982 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 340(3) के अंतर्गत कार्यवाही ज्ञापन के साथ प्रस्तुत किया जा चुका है।

Q:- राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की स्थापना कब की गई?
Ans:- NCBC - National Commission for Backward Classes राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की स्थापना 14 अगस्त, 1993 में की गई।

Q:- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन क्यों किया गया?
Ans:- 1992 के इंद्रा साहनी मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court Of India) ने सरकार को निर्देश दिया था कि वह लाभ और सुरक्षा के उद्देश्य से विभिन्न पिछड़े वर्गों के समावेशन (Inclusions) और बहिष्करण (Exclusions) पर विचार करने तथा जाँच एवं सिफारिश के लिये एक स्थायी निकाय का गठन करे। इसलिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC - National Commission for Backward Classes) का गठन किया गया।

Q:- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के वर्तमान अध्यक्ष कौन हैं?
Ans:- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. भगवान लाल साहनी (Dr. Bhagwan Lal Sahni) हैं।
 
Q:- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल कितना होता है?
Ans:- राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग (NCBC - National Commission for Backward Classes) के अध्‍यक्ष और सदस्‍यों का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से तीन वर्ष का होगा। एक सदस्‍य को सिर्फ दो बार ही आयोग में नियुक्‍त किया जा सकता है। आयोग के किसी भी पद पर एक व्‍यक्ति को तीसरी नियुक्ति का प्रावधान नहीं है। सदस्‍यों द्वारा त्‍याग पत्र देने या हटाने की प्रक्रिया भी नियमावली में बतायी गयी है।

Q:- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग कौन से अनुच्छेद में है?
Ans:- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 340 में सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गो के लिये आयोग बनाने का उल्लेख किया गया है और इसके आधार पर ही 1953-55 में काका कालेकर आयोग का व 1978-80 में मंडल कमीशन का गठन किया गया था।

Q:- ओबीसी वर्ग में क्या क्रीमी लेयर और गैर क्रीमी लेयर के बीच अंतर है?
Ans:- ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) को दो श्रेणी में बांटा गया है - क्रीमी लेयर और नॉन क्रीमी लेयर। ओबीसी में क्रीमी लेयर क्या है? (OBC Me Creamy Kya Hai In Hindi) - ओबीसी वर्ग के किसी परिवार का वार्षिक आय (Annual Income) 8 लाख से अधिक है तो उस परिवार को क्रीमी लेयर (Creamy Layer) के श्रेणी में रखा गया है। इन्हें नौकरी और शिक्षा में 27% आरक्षण नहीं मिलता है। ओबीसी में नॉन क्रीमी लेयर क्या है? (OBC Me Non Creamy Kya Hai In Hindi) - ओबीसी वर्ग के किसी परिवार का वार्षिक आय (Annual Income) 8 लाख से कम है तो उस परिवार को नॉन क्रीमी लेयर (Non Creamy Layer) के श्रेणी में रखा गया है। इन्हें नौकरी और शिक्षा में 27% आरक्षण मिलता है।

दोस्तो, आशा है इस आर्टिकल में शेयर की गई जानकारी - अन्य पिछड़ा वर्ग किसे कहते हैं? - Any Pichhada Varg Kise Kahate Hai? / OBC Kise Kahte Hai? भारतीय संविधान में पिछड़े वर्गों के लिए क्या प्रावधान है? OBC का आरक्षण कितना है? ओबीसी आरक्षण कब लागू हुआ? राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की स्थापना कब की गई? राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन क्यों किया गया? राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग कौन से अनुच्छेद में है? ओबीसी वर्ग में क्या क्रीमी लेयर और गैर क्रीमी लेयर के बीच अंतर है? आपको पसंद आया हो तो सोशल मीडिया फेसबुक , ट्विटर, व्हाट्सएप, और टेलीग्राम पर दुसरो तक शेयर करें और नीचे कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। धन्यवाद
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