"जय भीम" का मतलब क्या होता है? | Jai Bhim Ka Matlab Kya Hota Hai?

By Satish
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Jai Bhim Meaning in Hindi
जय भीम साथियों, क्या आप जानना चाहते हैं कि "जय भीम का मतलब क्या होता है?" | Jai Bhim Ka Matlab Kya Hota Hai? Jai Bhim Meaning in Hindi, जय भीम' का नारा किसने दिया? जय भीम" का नारा कैसे शुरुआत हुई? तो बिल्कुल सही आर्टिकल पढ़ रहे हैं क्योंकि इस आर्टिकल में आपको जय भीम नारा से संबंधित जानकारी मिलने वाली है। मुझे विश्वास है कि इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको दूसरी आर्टिकल पढ़ने की जरूरत नही पड़ेगी। इसलिए इस आर्टिकल को एक बार अंत तक जरूर पढ़ें। आगे पढ़ें:-

अभी हाल में ही तमिल फ़िल्मों के सुपरस्टार सूर्या की एक फ़िल्म रिलीज हुई है जिसका नाम "जय भीम" है। यह फ़िल्म न्याय के लिए एक आदिवासी महिला के संघर्ष को दर्शाती है। Jai Bhim Movie अगर अपने नही देखा है तो एक जरूर आपको देखना चाहिए, देख लिए है तो नीचे कमेंट कर बताए कि Jai Bhim Movie देख लिए है।

इस फ़िल्म के रिलीज होने के बाद से "जय भीम" शब्द काफी चर्चा हो रही है। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर जय भीम का अर्थ क्या होता है? Jai Bhim Ka Arth Kya Hota Hai? और जय भीम' का नारा किसने दिया? जय भीम" का नारा कैसे शुरुआत हुई? यहाँ तक कि आपको भी यही इच्छा है कि Jay Bhim ka matlab kya hota hai?

आइये जानते है - जय भीम का मतलब क्या है? इसके बाद हम जानेंगे कि "जय भीम (Jai Bhim)" शब्द आया कहा से? आगे पढ़िए:- Jai Bhim Meaning in Hindi

"जय भीम" का मतलब क्या होता है? | Jai Bhim Ka Matlab Kya Hota Hai?

"जय भीम" का अर्थ है - "भीम की जीत हो" अर्थात "बाबासाहब डॉ. आम्बेडकर जिंदाबाद"। जय भीम वाक्यांश का इस्तेमाल खासकर बाबासाहेब डॉ आम्बेडकर की प्रेरणा से अपने को बौद्ध धर्म में परिवर्तित किया लोगो के द्वारा किया जाता है। यह अपने मूल अर्थ से धार्मिक नहीं है। इसे धार्मिक वाक्यांश के रूप में नहीं माना जाता।

जय भीम शब्द का उपयोग बाबासाहेब डॉ आम्बेडकर से प्रेरित समुदाय अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, वामपंथियों, उदारवादियों द्वारा इसे अभिवादन का एक शब्द के रूप में और बाबा साहेब डॉ भीमराव आम्बेडकर के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में किया जाता हैं।

भारत के 14वें और वर्तमान राष्ट्रपति आदरणीय राम नाथ कोविन्द (Ramnath Kovind) जी अपने एक भाषण और ट्वीट में बताया है - 'जय भीम' का मतलब है - ‘डॉ. आंबेडकर की जय’। ‘डॉ. आंबेडकर की जय’ का मतलब है - "उनकी विरासत तथा आदर्शों और उनके द्वारा देश को दिए गए संविधान - इन सबकी जय हो"

तमिल फ़िल्मों के सुपरस्टार सूर्या की अभी हाल में ही रिलीज फ़िल्म "जय भीम (Jai Bhim) के अंत में जय भीम का अर्थ (Meaning of Jai Bhim) लिखा है:-
Jai Bhim
  • Jai Bhim means Light...
  • Jai Bhim means Love...
  • Jai Bhim means Journey from Darkness to Light...
  • Jai Bhim means Tears of Billions of People!
- Maratha Poetry
हिंदी अनुवाद
जय भीम
  • जय भीम का मतलब है प्रकाश...
  • जय भीम का मतलब होता है प्यार...
  • जय भीम का मतलब है अंधकार से प्रकाश की यात्रा...
  • जय भीम यानी अरबों लोगों के आंसू!
- मराठा कविता

जय भीम शब्द कहाँ से आया है? | Jai bhim Shabd Kahan Se Aaya Hai?

"जय भीम" शब्द भारतीय संविधान निर्माता भारतरत्न ज्ञान के प्रतीक बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के नाम से आया है। बाबा साहेब डॉ आंबेडकर आंदोलन के लिए प्रतिबद्ध लोग उनके सम्मान में उन्हें 'जय भीम' कहते हैं। जय भीम केवल अभिवादन का शब्द नहीं है बल्कि आज यह आंबेडकर आंदोलन का नारा बन गया है। आंबेडकरवादी आंदोलन के कार्यकर्ता "जय भीम - Jai Bhim" वाक्यांश को आंदोलन की संजीवनी कहते हैं।

जय भीम वाक्यांश का प्रयोग कहाँ-कहा होता है?

जय भीम वाक्यांश का प्रयोग आम्बेडकरवादियों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से एक दूसरे से मिलने पर, फोन पर, टेक्ट्स मैसेज इत्यादि में अभिवादन के रूप में किया जाता है।

जब कोई व्यक्ती दुसरे व्यक्ती को अभिवादन या सम्मान में 'जयभीम' बोलता या लिखता हैं, तो सामने वाला व्यक्ती भी 'जयभीम' या 'सप्रेम जयभीम' (प्यार भरा जयभीम) कहकर उसका अभिवादन या सम्मान करता है या जवाब देता है।

पहले महाराष्ट्र में आंबेडकर आंदोलन के कार्यकर्ता एक दूसरे से मिलते वक्त 'जय भीम' कहते थे. लेकिन अब 'जय भीम' नारा भारत में इतना फैल चुका है कि कोने कोने में प्रयोग किया जाता है। अब सिर्फ भारत मे ही नही बल्कि विश्व में भी जय भीम के नारे तेजी से फैल रहा है।

आगे पढ़िये- "जय भीम" का नारा सबसे पहले किसने दिया? या 'जय भीम' का नारा किसने दिया? जय भीम का नारा कब से शुरु हुई? Jai bhim ka nara Kaise Shuruaat Hui?

जय भीम का नारा सबसे पहले किसने दिया?

'जय भीम' का नारा सबसे पहले बाबा साहेब डॉ आंबेडकर आंदोलन के एक कार्यकर्ता "Baba Hardas Lakshman Nagrale - बाबू हरदास एल.एन. (लक्ष्मण नागराले) ने 1935 में दिया था। बाबू हरदास एल.एन. कौन थे? बाबू हरदास सेंट्रल प्रोविंस-बरार परिषद के विधायक (Central Provinces-Berar Council MLA) थे और बाबासाहेब डॉ भीमराव आंबेडकर के विचारों का पालन करने वाले एक प्रतिबद्ध कार्यकर्ता थे।

बाबू हरदास एल.एन. 1921 में बाबासाहब डॉ अम्बेडकर के साथ सामाजिक आंदोलन में उतरे। बाबू हरदास का परिवार पढ़ा लिखा था। पिता लक्ष्मण उरकुडा नगराले रेलवे विभाग में बाबू थे। उस समय देश में वर्णभेद और जाति भेद के कारण भीषण सामाजिक और आर्थिक विषमता फैली हुवि थी। सन 1922 में महाराष्ट्र के अछूत संत चोखामेला के नाम पर उन्होंने एक छात्रावास शुरू किया।

1924 में उन्होंने एक प्रिंटिंगप्रेस खरीदी थी और सामाजिक जागृति के लिये मंडई महात्म्य नामक किताब जागृति के लिये लिखी थी, साथ ही चोखामेला विशेषांक भी निकाला था। उन्होंने बाबासाहब डॉ आंबेडकर के आंदोलनों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। 12 जनवरी 1939 को उनका परिनिर्वाण के बाद डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था, 'मेरा दाहिना हाथ चला गया।

20 मार्च 1927 को चावदार झील के सत्याग्रह और 02 मार्च 1930 को नासिक के कालाराम मंदिर में लड़ाई के कारण डॉ. आंबेडकर (Dr Ambedkar) का नाम हर घर में पहुंच चुका था। इसके बाद महाराष्ट्र में डॉ. आंबेडकर ने जिन दलित नेताओ को आगे बढ़ाया उसमे से एक बाबू हरदास थे। रामचंद्र क्षीरसागर (Ramchandra Kshirsagar) द्वारा लिखित किताब "Dalit Movement in India and its leaders (दलित मूवमेंट इन इंडिया एंड इट्स लीडर्स)" के अनुसार 'जय भीम' का नारा सबसे पहले बाबू हरदास एल. एन. ने दिया था। आगे पढ़िए - "जय भीम" का नारा कैसे शुरुआत हुई? Jai bhim ka nara Kaise Shuruaat Hui?

"जय भीम" का नारा कैसे शुरुआत हुई?

1930 के नासिक कालाराम मंदिर सत्याग्रह तथा 1932 में पूना पैक्ट के दौरान बाबू हरदास एल. एन. ने बाबा साहब डॉ आंबेडकर के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय कार्यकर्तताओं के साथ घूमते हुये रास्ते में देखा - जब एक मुस्लिम को दूसरे मुस्लिम से मिलता है तो "अस्सलामु अलैकुम" बोलता है जवाब में दूसरे व्यक्ति ने "वा अलैकुम अस्सलाम" बोलता है। तब बाबू हरदास ने सोचा कि हमें एक दूसरे से क्या कहना चाहिये? उन्होंने कार्यकर्तताओं से कहा, मैं "जय भीम" कहूँगा और आप "बल भीम" कहिये। उस समय से ये "जय भीम" वाक्यांश का अभिवादन शुरू हो गया, पर बाद में "बल भीम" प्रचलन से गायब हो गया, केवल "जय भीम - Jai Bhim" ही प्रचलन में रहा।

गुंडागर्दी करने वाले असामाजिक लोगों को नियंत्रण में लाने और समानता के विचारों को हर गाँव में फैलाने के लिए बाबा साहेब डॉ आंबेडकर ने 1933-34 में समता सैनिक दल की स्थापना की थी। बाबू हरदास (Babu Hardas LN) समता सैनिक दल के सचिव थे। बाबू हरदास ने समता सैनिक दल को जय भीम का नारा नागपुर में दिया। बाद में डॉ अम्बेडकर ने खुद भी 1949 में अपने पत्रों में जय भीम लिखना और कहना शुरू कर दिया था। इस तरह "जय भीम" का नारा शुरुआत हुई।

कवि बिहारी लाल हरित ने 'जय भीम" शब्द का प्रयोग पहली बार सन 1946 में कविता के माध्यम से दिल्ली में किया। कविता के बोल थे:

"नवयुवक कौम के जुट जावें सब मिलकर कौम परस्ती में, जय भीम का नारा लगा करे भारत की बस्ती-बस्ती में।"

उत्तम कांबले (Uttam Kamble) के शब्दों में कहे तो - "जय भीम सिर्फ अभिवादन नहीं है, यह एक समग्र पहचान बन गया है। इस पहचान के विभिन्न स्तर हैं. 'जय भीम' संघर्ष का प्रतीक बना, यह एक सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ एक राजनीतिक पहचान भी बन गया है। मुझे लगता है कि यह क्रांति की समग्र पहचान बन चुका है"।

वर्तमान समय में 'जय भीम' वाक्यांश आंदोलन का भी प्रतीक बन गया है। तमिल फिल्म के सुपरस्टार सूर्या की फ़िल्म जय भीम भी "न्याय के लिए एक आदिवासी दलित महिला के संघर्ष को दर्शाती है"।

भारत के उभरते नेता और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने भी अपनी का नाम 'भीम आर्मी (भीम सेना भारत एकता मिशन)' रखा है। जो दबे कुचले, शोषित वंचितों, किसानों, अल्पसंख्यक के लिए लड़ता करता है।

2019 में जब दिल्ली में CAA (नागरिकता संशोधन क़ानून) के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुआ तो मुस्लिम समुदाय के प्रदर्शनकारियों ने बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर की तस्वीरें लहराईं।

पंजाबी लोकगीत, रैप और हिप-हॉप गायिका गिन्नी माही (Ginni Mahi) ने भी नौ बार साड़ी बदलकर 'जय भीम-जय भीम, बोलो जय भीम' गाया है। वह भीम गीतों के लिए प्रसिद्ध हैं। जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी "जय भीम-जय भीम, बोलो जय भीम" गीत गा चुकी है।

यह सभी तथ्य इस बात का संकेत है कि अब 'जय भीम -Jai Bhim' का नारा किसी एक समुदाय और भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है।

आज "जय भीम" वाक्यांश / नारा बहुजन अस्मिता और एकता का प्रतीक बन चुका है। हर बहुजन युवा उत्साह से जय भीम के साथ एक दूसरे का अभिवादन करते हैं।

दोस्तों आशा है कि इस आर्टिकल में दी गई जानकारी - जय भीम" का मतलब क्या होता है?" | Jai Bhim Ka Matlab Kya Hota Hai? | जय भीम का अर्थ क्या होता है? Jai Bhim Ka Arth Kya Hai, Jai Bhim Meaning in Hindi, जय भीम' का नारा किसने दिया? जय भीम" का नारा कैसे शुरुआत हुई? "जय भीम" का नारा सबसे पहले किसने दिया? जय भीम क्या है? Jai Bhim Kya Hai? आपको पसंद आया तो अपने दोस्तों, रिस्तेदारों और परिचितों के साथ सोशल मीडिया जैसे- फेसबुक, व्हाट्सएप, टेलीग्राम, ट्विटर पर शेयर करे और नीचे कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। जय भीम
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लोहार शिक्षा केंद्र बाल प्रतिभा सम्मान समारोह 2022 | Lohara Shiksha Kendra Bal Pratibha Samman Samaroh 2022

By Satish
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लोहार शिक्षा केंद्र बाल प्रतिभा सम्मान समारोह 2022

लोहार शिक्षा केंद्र बाल प्रतिभा सम्मान 2022 | Lohara Shiksha Kendra Bal Pratibha Samman 2022

बिहार (पटना, 20 नवम्बर, 2021) | आदरणीय अभिभावक गण, माताएं बहनें एवं युवा साथियों, बड़े हर्ष के साथ आप सभी को सूचित किया जाता है कि पिछले दो वर्षों (2020 और 2021) की तरह ही आने वाले अगले वर्ष 2022 में "लोहार शिक्षा केंद्र बाल प्रतिभा सम्मान 2022" का आयोजन राज्य स्तर पर ऑनलाइन कांफ्रेंस के द्वारा किया जाएगा और अनुसूचित जनजाति लोहार समुदाय (Scheduled Tribes Lohara Community) बिहार के 10वीं और 12वी में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को नगद पुरस्कार राशि के साथ साथ प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया जाएगा। यह आयोजन 2022 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित 10वीं और 12वीं के रिजल्ट घोषित होने के बाद आयोजित किया जाएगा।

अतः आप सभी से आग्रह है कि इस संदेश को अपने समुदाय के सभी परिवार तक अवश्य पहुंचाने का कार्य करे ताकि वर्ष 2022 में 10वीं और 12वीं की परीक्षा देने वाले अपने समुदाय के छात्र छात्राएं अभी से कड़ी मेहनत करें और वार्षिक परीक्षा 2022 में अच्छे अंको से पास होकर अपने परिवार के साथ - साथ लोहार समुदाय का नाम रौशन कर सकें। साथ ही साथ यह पुरस्कार जीत सकें।

आयोजन से संबंधित नियम एवं शर्तें:

  • नियमित सेशन 2022 में पास करने वाले छात्र छात्राएं ही आयोजन में शामिल होने के पात्र होंगे।
  • इस आयोजन का लाभ सिर्फ बिहार बोर्ड से पास छात्र छात्राओं को मिलेगा।
  • इस आयोजन का लाभ सिर्फ बिहार राज्य के अनुसूचित जनजाति (ST) लोहार (LOHARA) समुदाय के छात्र छात्राओं को मिलेगा।
  • आयोजन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को एक्टिव उपस्थित रहना होगा। ऐसे प्रतिभागी जिनका पुरस्कार के लिए चयन हुआ हो, अगर वे आयोजन के समय उपस्थित नहीं रहते हैं तो ऐसे प्रतिभागियों के स्थान पर पुरस्कार के लिए चयनित प्रतिभागी से कम अंक वाले प्रतिभागी को पुरस्कार दिया जाएगा।

Prize Money For 10th Student

  • 1st Prize: ₹4100
  • 2nd Prize: ₹3100
  • 3rd Prize: ₹2100
  • Consolation Prize For other (Top 10): ₹551

Prize Money For 12th Student

  • 1st Prize: ₹5100
  • 2nd Prize: ₹4100
  • 3rd Prize: ₹3100
  • Consolation Prize For other (Top 10): ₹751

लोहार शिक्षा केंद्र बाल प्रतिभा सम्मान समारोह - 2022 में भाग लेने का प्रक्रिया:

बिहार राज्य के अनुसूचित जनजाति लोहार (LOHARA) समुदाय के वैसे छात्र छात्राएं जो वर्ष 2022 में BSEB से 10वीं और 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण हुए है अगर वे इस आयोजन में भाग लेना चाहते है तो अपना डॉक्यूमेंट् ईमेल आईडी loharashikshakendra@gmail.com पर भेजे।

इस प्रतियोगिता में भाग लेने - वाले सभी छात्र छात्राओं को निम्नलिखित डॉक्यूमेंट का स्कैन/फ़ोटो/पीडीएफ कॉपी ईमेल पर भेजना अनिवार्य है।
  1. मार्कशीट
  2. एडमिट कार्ड
  3. कैंडिडेट या गार्जियन का जाति प्रमाण पत्र
  4. एक्टिव मोबाइल नंबर जिस पर कैंडिडेट या गार्जियन से बात हो सकें।
  5. कैंडिडेट, माता पिता का नाम और घर का पता हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में ताकि उसे प्रमाण पत्र पर सही से लिखा जा सकें।
नोट:- आधी-अधूरी जानकारी / निर्धारित तिथि के बाद / अन्य माध्यमों से भेजा गया डाक्यूमेंट्स और जानकारी पर कोई विचार नही किया जाएगा और नही आयोजक सह व्यवस्थापक उत्तरदायी होंगे।

आयोजन कैसे होगा?:- Zoom App के माध्यम से ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा आयोजित किया जाएगा।

पुरस्कार राशि कैसे भेजा जाएगा?:- पुरस्कार राशि चयनित अभ्यर्थियों के खाता में ऑनलाइन भेजा जाएगा।

प्रमाण पत्र कैसे भेजा जाएगा?:- प्रथम टॉप 3 प्रतिभागियों का प्रमाण पत्र स्पीड पोस्ट से उनके द्वारा दिए गए पते पर भेज जाएगा और बाकी अन्य चयनित प्रतिभागी का डिजिटल प्रमाण पत्र ईमेल के द्वारा भेजा जायेगा।

नोट:- प्रमाण पत्र का प्रिंट आउट निकाल कर अपने माता-पिता / अभिभावक के साथ कम से कम एक फोटो खींच कर लोहार शिक्षा केंद्र के ईमेल आईडी पर भेजना अनिवार्य होगा।

आयोजन का तारीख:- इसके बारे में BSEB Result 2022 Class 10 और 12 आने के बाद जल्द ही आप लोगों को बताया जाएगा।

डॉक्यूमेंट भेजने का अंतिम तिथि और समय:
BSEB Result 2022 Class 10 और 12 आने के बाद जल्द ही आप लोगों को बताया जाएगा।

आयोजक सह व्यवस्थापक:

श्री जय प्रकाश शर्मा, श्री राजेश विश्वकर्मा, श्री संजीव कुमार, श्री अजीत आकाश, श्री श्रवण कुमार, श्री सतीश कुमार शर्मा, श्री धामू शर्मा, श्री अमन कुमार, श्री ए.बी. शर्मा एवं समस्त आदिवासी लोहार समुदाय बिहार।

संपर्क सूत्र: - लोहार जनसंघ बिहार और लोहार शिक्षा केंद्र बिहार। किसी भी अन्य जानकारी हेतु उपर्युक्त ईमेल आईडी पर संपर्क किया जा सकता है।

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रातो रात फेमस हो गया, यह व्यक्ति आखिर क्या कर दिया?, यह कौन हैं?, वायरल हुआ वीडियो

By Satish
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Rakesh Vishwakarma
अपने एक सुप्रसिद्ध कहावत सुना ही होगा - "आवश्यकता आविष्कार की जननी है"। इसके अर्थ है - हमारे जीवन को सुचारू रूप से चलने के लिए जब किसी वस्तु की बहुत जरुरत पड़ती हैं, हम उस विशिष्ट वस्तु के बिना जीवित नहीं रह सकते हैं या हमारा विशिष्ट कार्य पूरा नही हो सकता तो हम उस जरूरत को पूरा करने के समाधान खोजते हैं जिसके परिणामस्वरूप किसी नई वस्तु का आविष्कार होता है।

लेकिन यह पेट्रोल और डीजल के कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण एक नई अविष्कार हुआ है। अविष्कारक का एक वीडियो वायरल हो गया, जिसे रातो रात कई मिलियन लोगो ने देखा। पढ़िये इस आर्टिकल में आगे की जानकारी कि क्या अविष्कार हुआ है? और यह अविष्कार किसने किया है जिसके वजह से रातो रात फेमस हो गए।

वायरल वीडियो में राकेश विश्वकर्मा जी हैं जो रजईपुर जंगीपुर गाजीपुर उत्तर प्रदेश निवासी हैं। जिनका फूलन पुर में छोटा मोटा एक दुकान है। इनका पास दो दो गाड़िया है। लेकिन पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत के कारण आने जाने में जो खर्च लगता है उसे उठाना मुश्किल है। इसलिए इन्होंने स्वयं से इलेक्ट्रिक-बैटरी वाला साइकिल अविष्कार कर दिया है। जिससे इनको प्रतिदिन 50-60 रुपये को बचत हो जाती है।

इनके इलेक्ट्रिक-बैटरी वाला साइकिल को चलाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर आ गया। जब अपना लोहार फेसबुक पेज पर यह वीडियो अपलोड हुआ तो इतना तेजी से वायरल हुआ कि रातो रात करोड़ो लोगो तक पहुंच गया। जिसे 6 मिलियन यानी कि 60 लाख से अधिक लोगों ने देखा और पसंद किया। साथ साथ जम कर तारीफ भी किया।

इस इलेक्ट्रिक-बैटरी वाला साइकिल का ख़यासियत है - एक बार फुलचार्ज होने के बाद 50 से 60 किलोमीटर चलता है। बैटरी को फुल चार्ज होने में 7-8 घंटे लगता है। इस इलेक्ट्रिक साइकिल का अधिकतम रफ्तार 25 किमी/घंटा है और मोटरसाइकिल की तरह आगे-पीछे लाइट भी लगा हुआ है। इसे चलाने में काफी आरामदेह भी है। इनको बहुत-बहुत धन्यवाद। साथ ही वीडियो रिकॉर्डिंग करने वाले भाई को आभार।

अगर आप भी इस वीडियो को देखना चाहते हैं तो नीचे वीडियो देख सकते हैं और अधिक से अधिक शेयर करे।


सोशल मीडिया पर लोगों का प्रतिक्रिया कुछ इस तरह है:-
आवश्यकता आविष्कार की जननी है। विश्वकर्मा जी को उनकी खोज के लिए साधुवाद। उनको सोशल मीडिया पर परचित कराने के लिए 'अपना लोहार' को धन्यवाद।
- कृष्णा विश्वकर्मा

बहुत ही सराहनीय कदम। विश्वकर्मा समाज को बहुत ही उपेक्षित कर दिया गया है। सच्चाई तो ये है कि विश्वकर्मा समाज आज भी उतना ही कार्यकुशलता है, जितना पहले था। अभियंता का ये जन्मजात गुण है, जिसे सर्वथा उपेक्षा ही मिलती रही, समाज को प्रोत्साहन की जरूरत है और महत्व भी है। उन्हें किसी अभियंता कालेज जाने की जरूरत नहीं पडती है। लेकिन आजकल सर्टिफिकेट के बिना उसकी कार्यकुशलता को तवज्जो नहीं मिलता है। जय बाबा विश्वकर्मा
- इंदु शर्मा
विश्व के निर्माणकर्ता विश्वकर्मा समाज को नमन
- विशाल यादव

जय हो विश्वकर्मा जी की अद्भुत कार्य यह तो जन्मजात से ही हमें ज्ञान और सद्बुद्धि मिली हुई है कि हम कुछ भी कार्य बड़ी आसानी से कर बैठते हैं। परंतु अपना प्रचार प्रसार करने में पीछे रह जाते हैं। इस पर एक बार विचार करना चाहिए तभी विश्वकर्मा समाज का उद्धार होगा।
- हरीश विश्वकर्मा

सरकार के तरफ से ऐसे व्यक्ति को पुरस्कृत करके और दूसरे राज्यों में डालने के लिए सरकार इन से सामंजस्य स्थापित करें और सभी राज्यों में इस मॉडल को विकसित करने के लिए केंद्र खोलें। धन्यवाद बधाई हो
- ननद किशोर निराला
You are great and your work is great
- दिनेश शर्मा
पेट्रोल की बढ़ती कीमत को मद्देनजर रखते हुए यह राकेश जी का सराहनीय कदम है इसके लिए इन्हें हार्दिक बंधाई
- वीरेंद्र सिंह ज्योतिरानंद

हार्दिक शुभकामनाएं। हमारे देश में एक से बढ़कर एक आविष्कारक हैं किंतु उन्हें सही मंच नहीं मिल पाता है जिससे हमारे आविष्कार का मंचन विश्व पटल पर नहीं हो पाता हैं
- संजय सिंह देवखरी

उत्तर प्रदेश सरकार को इन को पुरस्कृत करना चाहिए और इनको उचित सहयोग देकर इनके कार्य को आगे बढ़ाएं
- विनोद शर्मा

भारत एक महान देश है। यहां प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत है उनको आगे बढ़ाने की l हमारे देश की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए सरकार को ऐसे होनहार की मदद करना चाहिए।
दिनेश चौधरी

जय हो विश्वकर्मा समाज की ऐसे ही कलाकार को सरकार सम्मानित करें।
शिव कुमार कश्यप

आपकी एक बेहतरीन सोच एवं आविष्कार को देखा जिसको देखकर मन आनंदित हो गया। आपकी सोच आगे बहुत से ऐसे लोगों को फायदा पहुंचा सकती है जिनके पास गाड़ी मोटरसाइकिल खरीदने के लिए पैसे नहीं। सरकार में बैठे उच्च पदों पर लोगों को चाहिए आपको भरपूर सहयोग देकर आपसे आपकी इस महान सोच अविष्कार को लोगों को फायदा दिलाएं आप की प्रतिभा को मेरा नमन ऐसे लोगों को अगर सहयोग नहीं किया गया यह एक बहुत बड़ी हानि होगी देश की प्रतिभा के प्रति।
- अनूप भाजपाई

जिंदादिल हुनरमंद देश की आन बान शान विश्वकर्मा जी को हृदय से अति अति धन्यवाद जो आपने आम आदमी के लिए इस तरह की युक्ति खोजी अति अति सुंदर वैसे पुनः पुनः स्वास्थ्य मंगल कामना के साथ अनंत अनंत शुभकामनाएं
- योगेंद्र योगी

इन्हें सरकार को पुरस्कृत करने के साथ ही इनकी कला को प्रोत्साहित करना चाहिए.
- राजेश बरनवाल

वाह शानदार प्रयास, बधाई हो।
- यमुना प्रजापति
बहुत-बहुत बधाई हो आपको विश्वकर्मा है तो संसार है
- प्रकाश विश्वकर्मा

Excellent work done. He is a blessed soul.
- रविंद गुलाटी

बहुत ही सराहनीय कार्य किया है
- धीरज सिंह राजपूत
Great technology
- अरविंद कुमार
The great work
- श्याम सुंदर यादव
महंगाई को देखते हुए अच्छा काम किया है,,,चाचा जी को बहुत बहुत बधाई हो।
- डॉ जयप्रकाश वर्मा
युवाओ को सीख लेना चाहिए। आत्मनिर्भर भारत।
- दीपक मोदनवाल गुप्ता
जितनी तारीफ करे काम है आप के कला की जय हो
- दुर्गेश एम मिर्ज़ापुर
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