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आक्रोशित आदिवासी लोहार समुदाय ने सासाराम में ट्रेन रोक कर किया जोरदार विरोध प्रदर्शन

सासाराम (बिहार) में (रविवार, सितंबर 30, 2018) लोहार विकास मंच के बैनर तले आदिवासी लोहार जाति के लोगों ने भभुआ-पटना इंटरसिटी ट्रेन (13250) को सासाराम रेलवे स्टेशन पर रोक दिया तथा रेल पटरी पर खड़े होकर जमकर नारे लगाए। नारों से गूँजता रहा रेलवे स्टेशन और रेल रोके जाने से यात्रियों को काफी परेशानी हुई। इन लोगों की मांग है कि भारत सरकार मे जनजातीय मंत्रालय से मांग की जा रही है कि एक्ट 23/2016 के आलोक में बिहार के आदिवासी अ०ज०जा० लोहार जाति (caste) का समस्या की समाधान के लिए देवनागरी लिपि में लोहार और Roman Script (रोमन लिपि) में LOHARA लिखा हुआ स्पष्ट राजपत्र और अधिसूचना (Notification) जारी करें।

सासाराम में आदिवासी लोहार समुदाय रेल रोको आंदोलन
सासाराम में आदिवासी लोहार समुदाय रेल रोको आंदोलन

पूरी मामला क्या हैं? आंदोलन के नेतृत्व कर रहे लोहार विकास मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकिशोर शर्मा ने बताया की बिहार के लोहार (LOHARA) जाति (Caste) 06 सितंबर,1950 से ही केंद्रीय अनुसूचित जनजाति सूची में है और 2006 तक था।। मगर कांग्रेस सरकार के सोची समझी धारणा के कारण एक्ट 48/2006 में LOHARA को देवनागरी लिपि में गैरकानूनी तरीका से लोहारा एक जाति बना दिया। जबकि देश में लोहारा कोई जाति नही है। सिर्फ रोमन लिपि में LOHARA लिखाता है। वर्तमान बीजेपी सरकार एक्ट 48/2006 में लिखा गया लोहारा का निरसन और संशोधन कर एक्ट 23/2016 से रद्ध कर दिया। लेकिन दो वर्ष बीतने के बाद भी आरक्षण विरोधियों के द्वारा स्पष्ट राजपत्र और अधिसूचना (Notification) रोकवा दिया गया है ताकि जनजातियों को लाभ नहीं मिले।

आगे श्री शर्मा ने बताया बिहार के आदिवासी लोहार समाज सरकार के अधिकारियों और कर्मियों के लिपि भूल का खामियाजा भुगत रहे हैं। स्पष्ट राजपत्र अधिसूचना का प्रकाशन नही होने से सेन्ट्रल सर्विस में परेशानी आ रही है। इस शब्दों के हेरफेर से लोहार जाति के लोगों के साथ अन्याय हो रहा है। इस मामले को लेकर लोहार विकास मंच भारत सरकार और जनजातीय मंत्रालय के विरोध में देश की राजधानी दिल्ली में संसद मार्ग पर 30 और 31 जुलाई, 2018 को दो दिवसीय 36 घंटे की सत्याग्रह भी बैठ चुकी है। जिसमें औरंगाबाद (बिहार) सांसद श्री सुनिल कुमार सिंह ने सत्याग्रह का संबोधन कर दिनांक 01 अगस्त, 2018 शुन्य काल मे लोहार (LOHARA) लिखा स्पष्ट अधिसूचना जारी का लोकसभा मे प्रश्न भी उठाया।

इस मामले में तीन बार (21/03/2018, 30 एवं 31/07/2018) जनजाति मंत्री और कानून मंत्री और कई अन्य मंत्रियों से भी मिल चुका गया है। साथ ही दर्जनो पत्राचार के बाद भारत सरकार एवं उच्चधीकारियों तक अपनी बात पहुचाने हेतू 01 सितंबर, 2018 को आरा रेल रोको आन्दोलन भी किया गया है। मगर सरकार के हठधर्मी के कारण समझने को तैयार नही। इसलिए आदिवासी लोहार समाज अपना समझाने का तरीका बदल दिया है। करो या मरो कार्यक्रम के अंतर्गत कठोर आन्दोलन कर और अपना अधिकार मांग रहा हैं।

यह आंदोलन चरणबद्ध ढंग से चलाए जाने वाले आंदोलन का दूसरा चरण था। जब तक एक्ट 23/2016 के आलोक में बिहार के आदिवासी अ०ज०जा० लोहार जाति (caste) का समस्या की समाधान के लिए देवनागरी लिपि में लोहार और Roman script(रोमन लिपि) में LOHARA लिखा हुआ स्पष्ट राजपत्र अधिसूचना (Notification) जारी नही होगा। तब तक आदिवासी लोहार समाज अपने हक और अधिकार के रक्षा के लिए करो या मरो कार्यक्रम के अंतर्गत कठोर आन्दोलन करता रहेगा। इस रेल रोको आन्दोलन में श्री केशव शर्मा (जिलाअध्यक्ष,सासाराम), श्री रविन्द्र शर्मा (जिलाध्यक्ष, आरा), प्रदेश सचिव- श्री रामा शंकर शर्मा , श्रीमती सिमा देवी जी, श्रीमती चन्द्रावती शर्मा जी, श्री सेखर शर्मा जी, श्री मेघनाथ शर्मा जी, उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय शिल्पकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री दशरथ शर्मा जी, नगर अध्यक्ष आरा से रामनरायण शर्मा, औरंगाबाद से Adv. श्री पारस नाथ शर्मा, चंद्रदीप शर्मा (सासाराम), श्री राधेश्याम शर्मा, विनोद शर्मा,शेरघाटी से चंद्रमल शर्मा, पंपु शर्मा, नौहट्टा से उपाध्यक्ष- श्री राम विनय जी, एवं राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती राजामुनी देवी, राधा शर्मा, सरिता देवी इत्यादि के साथ बिहार के 38 जिलों के छात्र, नवजवान, बूढ़े, महिलाओं के सहित अन्य राज्यो के हजारो हजारो की संख्या मे आदिवासी लोहार समाज एवं 31 आदिवासी समाज के जनसैलाब रेल पटरी पर उपस्थित होकर रेल चक्का जाम कर अपनी माग हेतु प्रदर्शन किया। वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

Satish
Satishhttps://www.apnalohara.com/
सतीश कुमार शर्मा ApnaLohara.Com नेटवर्क के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ हैं। वह एक आदिवासी, भारतीय लोहार, लेखक, ब्लॉगर और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
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